राजस्थान की पहली 100% ऑर्गेनिक पंचायत को राष्ट्रीय पहचान, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे बामनवास कांकर का दौरा

Friday, Feb 06, 2026-10:36 AM (IST)

राजस्थान के ग्रामीण विकास और टिकाऊ कृषि के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। कोटपूतली–बहरोड़ जिले की बामनवास कांकर ग्राम पंचायत राज्य की पहली ऐसी पंचायत बन गई है, जिसने अपने 100 प्रतिशत कृषि क्षेत्र और 100 प्रतिशत पशुधन को पूर्ण रूप से ऑर्गेनिक प्रणाली में परिवर्तित कर दिया है। इस अभिनव पहल को रसायन-मुक्त खेती और पर्यावरण-संरक्षण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।

बुधवार को नई दिल्ली स्थित ICAR–पूसा में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस उपलब्धि पर संज्ञान लिया। उन्होंने बामनवास कांकर के किसानों और कोफेड (Cofarmin Federation of Organic Societies and Producer Companies) को बधाई देते हुए कहा कि यह मॉडल भारत की टिकाऊ कृषि के लिए एक मिसाल बन रहा है। मंत्री ने पंचायत का दौरा कर किसानों से सीधे संवाद करने की इच्छा भी जताई।

बैठक के दौरान कोफेड के संस्थापक जितेन्द्र सेवावत ने किसानों की ओर से ऑर्गेनिक फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन प्रीमियम मूल्य (MSPP) लागू करने का मुद्दा उठाया। इस पर केंद्रीय मंत्री ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और वे स्वयं बामनवास कांकर पहुंचकर किसानों से चर्चा करेंगे।

बामनवास कांकर की सफलता अब अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। इस मॉडल से प्रेरित होकर राजस्थान के दो अन्य जिलों में भी ऑर्गेनिक परिवर्तन की शुरुआत हो चुकी है। इनमें बीकानेर जिले की सहजराजसर पंचायत (लूणकरणसर तहसील) और भीलवाड़ा जिले की ढिकोला पंचायत (शाहपुरा तहसील) शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे समुदाय-आधारित प्रयास देश की दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आर्थिक समृद्धि के लिए बेहद आवश्यक हैं।

पिछले महीने बामनवास कांकर ने एक और इतिहास रचते हुए अपने 1,500 हेक्टेयर से अधिक कृषि क्षेत्र और 6,000 से अधिक पशुओं को पूरी तरह ऑर्गेनिक खेती और पशुपालन के अंतर्गत ला दिया। इसके साथ ही यह पंचायत उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत की उन चुनिंदा पंचायतों में शामिल हो गई है, जिन्होंने इतने व्यापक स्तर पर ऑर्गेनिक परिवर्तन सफलतापूर्वक किया है।

इस उपलब्धि को औपचारिक रूप से 2 जनवरी को आयोजित
“रासायनिक खेती और पशुपालन के विरुद्ध संकल्प समारोह”
के माध्यम से मान्यता दी गई। इस कार्यक्रम में किसानों, पशुपालकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कीटनाशक-मुक्त खेती, ऑर्गेनिक पशुपालन और पर्यावरण संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया।

बामनवास कांकर का यह परिवर्तन पूरी तरह समुदाय-नेतृत्वित पहल का परिणाम है। किसानों ने मिट्टी की गिरती उर्वरता, भूजल स्तर में कमी, बढ़ती खेती लागत और रासायनिक खेती से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए ऑर्गेनिक खेती की राह चुनी। कोफेड ने इस बदलाव में तकनीकी प्रशिक्षण, किसान क्षमता निर्माण और बाज़ार से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।

इस सफलता के आधार पर कोफेड ने 2026 तक राजस्थान के बीकानेर, अलवर, कोटपूतली–बहरोड़ और भीलवाड़ा जिलों की 300 पंचायतों को पूरी तरह ऑर्गेनिक बनाने का लक्ष्य रखा है। किसानों का कहना है कि ऑर्गेनिक खेती से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार, नमी संरक्षण, जैव विविधता में वृद्धि और आय में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

आज बामनवास कांकर यह साबित करता है कि जब किसान, संस्थाएं और समुदाय एकजुट होते हैं, तो भारत की टिकाऊ और मजबूत कृषि की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है।


 


Content Editor

Payal Choudhary

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