देश में नेटबंदी मामले में जयपुर का तीसरा नंबर, जब सूचना लीक हो ही जाती है तो फिर बैन का क्या मतलब?
Monday, Jun 08, 2026-04:19 PM (IST)
जयपुर। भारत के कई राज्यों में सरकारो द्वारा कई मौकों पर इंटरनेट बैन किया जाता रहा है, ताकि ऐसी सूचनाएं बाहर नहीं आ जिससें जन मानस का नुकसान हो। ऐसा अक्सर धार्मिक आयोजनों, इमरजेंसी, महत्वपूर्ण परीक्षाओं के आयोजन या सरकार द्वारा विकास के नाम पर ध्वस्तीकरण के समय किया जाता है। ऐसे में इंटरनेट बैन के मामले में उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, बिहार और महाराष्ट्र के बाद राजस्थान देश में पांचवे नंबर पर आता है। आपको यह भी जानकर हैरानी होगी की भारत के सबसे शांत शहरों में शुमार जयपुर का नंबर नेटबंदी वाले टॉप पांच शहरों में तीसरे नंबर आता है। इस मामले में श्रीनगर पहले, जम्मू दूसरे, उदयपुर चौथे और लखनउ पांचवे नंबर पर है। अकेले जयपुर शहर में सामाजिक विरोध प्रदर्शन, धार्मिक/राजनीतिक तनाव या कानून-व्यवस्था के नाम पर 2015 से अब तक लगभग 14 बार नेटबंदी की गई है।
जयपुर में सबसे बड़ी नेटबंदी
आज जयपुर में 24 घंटे की नेटबंदी करके जगतपुरा-नंदपुरी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण का कार्य किया जा रहा है। जयपुर के लगभग 40 इलाकों में इंटरनेट बंद करके जयपुर विकास प्राधिकरण ने रेलवे लाइन के समानांतर सड़क को निर्धारित 80 फीट चौड़ा करने के लिए अभियान चलाया। इस अभियान के तहत दो मंदिर, एक मस्जिद, एक मजार और एक सत्संग भवन को हटाया जा रहा है। यह अब तक की सबसे बड़ी नेटबंदी रही।
नेटबंदी के बावजूद सूचनाएं लीक
आपको बता दें कि सरकार की तरफ से राजस्थान में लगभग जहां पर भी इंटरनेट बैन कर विकास के नाम पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की जाती रही है, वहां से तुरंत वीडियो लीक होकर बाहर आते रहे हैं। ऐसे में सवाल ये उठता है कि जब येन केन प्रकारेण सूचनाएं लीक हो ही जाती हैं तो ऐसी नेटबंदी के क्या मायने?
जनता के लिए परेशानी का सबब
इंटरनेट आज के समय में शहरों में रहने वाले लोगों की सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में से एक बन चुका है जिसके बैन होने पर सारे काम काज लगभग ठप हो जाते हैं। आज ही की बात करें तो जगतपुरा में की गई कार्रवाई को लेकर 24 घंटे की नेटबंदी भी कारगर साबित नहीं हुई क्योंकि जिस नूरानी मस्जिद को गिराने की प्रक्रिया को छुपाने का प्रयास किया गया था, उसका वीडियो बाहर आ ही गया। हुआ कुछ नहीं, बस जयपुर शहर और उसके पास पास रहने वाली लगभग 45 से 46 लाख की जनता की आंखों में धूल झोंकने का काम हुआ।
इंटरनेट बंद से होने वाले नुकसान
जयपुर राजस्थान की राजधानी होने के साथ ही राज्य का बिजनेस हब भी है जहां पर इंटरनेट बैन होने से ई-कॉमर्स, ऑनलाइन बैंकिंग, स्टॉक ट्रेडिंग, डिजिटल पेमेंट बंद होने से आर्थिक गतिविधियाँ प्रभावित हुई हैं, साथ ही ऑनलाइन फ्रीलांसर और छोटे व्यवसाय अपने ग्राहकों से कनेक्ट नहीं कर पाए जिससे आमदनी पर असर पड़ा है। इतना ही नहीं बल्कि नेटबंदी का नुकसान शिक्षार्थियों को भी उठाना पड़ा है। अगर बात करें सरकारी और आपातकालीन सेवाओं पर नेटबंदी के असर की तो इससें बैंकिंग, बिजली, पानी, स्वास्थ्य सेवाएँ, और आपदा प्रबंधन में डिजिटल सिस्टम रुक सकता है। आपको बता दें कि जयपुर शहर में साढ़े चार से पांच लाख मोबाइल फोन धारक हैं जिनमें से लगभग आधे लोग यूपीआई, मोबाइल वॉलेट, बैंक ऐप और ई-कॉमर्स के जरिए पेमेंट करते हैं। इन लोगों द्वारा एक ही दिन में लगभग तीन हजार करोड़ रूपये का ट्रांजेक्शन किया जाता है। हालांकि, कैबल इंटरनेट व वाई—फाई सुविधा उपलब्ध रही, लेकिन उसका ज्यादा फायदा आम यूजर्स को नहीं मिल पाता है। वहीं, अगर जयपुर में शेयर मार्केट ट्रेडिंग की बात करें ये रोज लगभग एक रोड़ रूपये की होती है जिसें भी नुकसान होता है।
क्या पुलिस बल और प्रशासन सक्षम नहीं
अगर बात करें जयपुर में पुलिस बल और प्रशासनिक अमले के साथ सीएलजी मेंबर्स की तो उसके सामने जयपुर के जगतपुरा में की गई कार्रवाई उसके सामने बहुत छोटी है। क्योंकि प्रशासनिक दृष्टि से चार भागों बांटे गए जयपुर शहर में 83 से 85 पुलिस स्टेशन हैं। इसके बावजूद यहां रिजर्व पुलिस लाईन और आरएसी की कई बटालियन हैं जो अपने दम पर यह काम बहुत ही आसानी से कर सकते थे। हालांकि, बावजूद इसके पुलिस और प्रशासन ने तो नेटबंदी करके अपना काम कर दिया, लेकिन सीएलजी मेंबर्स की भूमिका के बारे में क्या कहना? यही वो मौका था जब सीएलजी मेंबर्स को आगे आते हुए पुलिस और प्रशासन के साथ मिलकर समाज के सभी वर्गों को एक सूत्र में पिरोकर अपनी महत्पूर्ण भूमिका निभाते हुए इस विकास कार्य को बिना किसी झंझट के निपटवाते? ऐसे में अब सीएलजी मेंबर्स भूमिका की पर सवाल उठ सकते हैं।
