रेगिस्तान में मीठे पानी की दस्तक! जैसलमेर में पहली बार जमीन के भीतर मिला ‘अथाह’ भूजल, बदलेगी पश्चिमी राजस्थान की तस्वीर
Wednesday, Jan 14, 2026-03:17 PM (IST)
जैसलमेर। पानी की भीषण किल्लत से जूझ रहे राजस्थान के रेगिस्तानी जिलों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर जिले में पहली बार जमीन के नीचे बड़ी मात्रा में भूजल की मौजूदगी सामने आई है। यह महत्वपूर्ण खुलासा केन्द्रीय जलशक्ति मंत्रालय के निर्देश पर कराए गए हेलीबोर्न जियोफिजिकल सर्वे में हुआ है, जिसने लंबे समय से प्यासे इस क्षेत्र में नई उम्मीद जगा दी है।
राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, चूरू, नागौर, जोधपुर, जालोर और पाली जैसे जिलों में वर्षों से पेयजल संकट बना हुआ है। गर्मियों में कई इलाकों में टैंकर और ट्रेन से पानी पहुंचाना पड़ता है। ऐसे में जैसलमेर के पोकरण क्षेत्र में 64 स्थानों पर भूजल की संभावना मिलना ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।
पोकरण क्षेत्र में उभरी राहत की किरण
सीएसआईआर–एनजीआरआई (हैदराबाद) द्वारा किए गए इस सर्वे की रिपोर्ट राजस्थान राज्य भूजल बोर्ड और जैसलमेर जिला प्रशासन को सौंप दी गई है। सर्वे में फलसूंड से छायण और धूसर से राजगढ़ तक के क्षेत्रों को शामिल किया गया, जहां अब तक पीने योग्य पानी का कोई स्थायी स्रोत नहीं था। भूजल वैज्ञानिक डॉ. नारायण दास इणखिया के अनुसार, यह सर्वे परिणाम बेहद सकारात्मक हैं और इससे क्षेत्र की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान निकल सकता है।
उन्होंने बताया कि जिन गांवों में सालों से पानी की किल्लत रही है, वहीं अब भूजल रिचार्ज और दोहन की संभावनाएं स्पष्ट रूप से सामने आई हैं। यह खोज न केवल जैसलमेर बल्कि पूरे पश्चिमी राजस्थान के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
क्या है हेलीबोर्न जियोफिजिकल सर्वे?
हेलीबोर्न जियोफिजिकल सर्वे एक अत्याधुनिक तकनीक है, जिसमें हेलिकॉप्टर पर विशेष भू-भौतिकीय उपकरण लगाए जाते हैं। यह तकनीक 500 मीटर तक जमीन के भीतर मौजूद जलधाराओं और एक्वीफर का सटीक नक्शा तैयार करती है। कम समय में बड़े क्षेत्र का सर्वे कर भूजल संरक्षण और उपयोग की ठोस योजना बनाई जा सकती है। यह तकनीक सीएसआईआर–एनजीआरआई द्वारा विकसित की गई है।
घटते भूजल स्तर के बीच अहम खोज
हालांकि यह राहत भरी खबर है, लेकिन चिंता भी कम नहीं है। केंद्रीय भूजल बोर्ड की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान देश में भूजल दोहन के मामले में दूसरे नंबर पर है। राज्य के 70 प्रतिशत से अधिक ब्लॉक ओवर-एक्सप्लॉइटेड श्रेणी में हैं और कई जगह फ्लोराइड की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है।
ऐसे में जैसलमेर में मिली यह नई जलसंभावना सरकार के लिए एक अवसर है—यदि समय रहते वैज्ञानिक तरीके से जल संरक्षण, रिचार्ज और संतुलित दोहन किया गया, तो यह खोज रेगिस्तान की प्यास बुझाने का आधार बन सकती है। अब नजरें राज्य सरकार की अगली कार्ययोजना पर टिकी हैं।
