मोहन भागवत बोले—हम बंटे हुए हैं इसलिए आक्रमण हो रहे हैं, भेदभाव छोड़ें; जैसलमेर में चादर महोत्सव में दिया एकता का संदेश

Friday, Mar 06, 2026-05:45 PM (IST)

राजस्थान के जैसलमेर में आयोजित चादर महोत्सव के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक Mohan Bhagwat ने समाज में एकता और सद्भाव का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देश पर आक्रमण इसलिए होते हैं क्योंकि समाज बंटा हुआ और कमजोर है। यदि समाज एकजुट हो जाए तो किसी भी प्रकार के संकट का सामना आसानी से किया जा सकता है।

जैसलमेर के देदांसर मेला ग्राउंड में आयोजित तीन दिवसीय चादर महोत्सव के मुख्य कार्यक्रम में संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि समाज को भेदभाव और स्वार्थ की भावना छोड़कर एकता के मार्ग पर आगे बढ़ना होगा।

उन्होंने कहा कि सभी लोग पंथ और संप्रदाय से अलग हो सकते हैं, लेकिन संस्कृति, देश और समाज के आधार पर हम सभी एक हैं। यदि यह भावना समाज में मजबूत हो जाए तो देश एक बार फिर विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

सोनार किले में पार्श्वनाथ मंदिर के किए दर्शन

कार्यक्रम से पहले मोहन भागवत जैसलमेर के ऐतिहासिक सोनार दुर्ग पहुंचे। यहां उन्होंने पार्श्वनाथ जैन मंदिर में दर्शन-पूजन किया और जिनभद्र सूरी ज्ञान भंडार तथा दादा गुरुदेव की पावन चादर के दर्शन किए।

इस दौरान वे ई-रिक्शा में बैठकर किले तक पहुंचे, जो वहां मौजूद लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।

समाज में एकता की आवश्यकता

अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि समाज में झगड़े और विवाद इसलिए होते हैं क्योंकि लोग अपने बीच के एकत्व को पहचान नहीं पाते

उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार लोग छोटी-छोटी बातों पर झगड़ पड़ते हैं, लेकिन जब उन्हें यह पता चलता है कि वे एक ही परिवार या समुदाय से जुड़े हैं तो उनके बीच का विवाद खत्म हो जाता है।

भागवत ने कहा कि यदि हम सभी एक-दूसरे को अपना मानें तो समाज में आपसी सहयोग और भाईचारा बढ़ेगा।

मंच की ऊंचाई से नहीं होती श्रेष्ठता

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि मंच पर बैठने या किसी ऊंचे स्थान पर बैठने का अर्थ यह नहीं होता कि कोई व्यक्ति दूसरों से श्रेष्ठ है।

उन्होंने कहा कि मंच की व्यवस्था केवल इसलिए होती है ताकि बोलने वाले को सभी लोग देख और सुन सकें। यदि कोई व्यक्ति इस व्यवस्था को अपनी श्रेष्ठता समझने लगे तो यह उसकी सोच की गलती है।

भागवत ने कहा कि समाज में सभी लोग समान हैं और किसी भी प्रकार का ऊंच-नीच का भाव नहीं होना चाहिए।

जन्म से सभी मनुष्य

अपने संबोधन में उन्होंने जाति व्यवस्था पर भी बात करते हुए कहा कि जन्म से सभी लोग मनुष्य होते हैं और जाति बाद में आती है

उन्होंने कहा कि कई बच्चों को तो अपनी जाति के बारे में तब पता चलता है जब वे स्कूल में फॉर्म भरते हैं। इसलिए समाज को जाति और संप्रदाय के आधार पर बांटना सही नहीं है।

भागवत ने कहा कि सभी संप्रदायों और परंपराओं का मूल संदेश एक ही है—मानवता और सद्भाव।

जैन समाज को हिंदुओं से अलग न समझें

कार्यक्रम में जैन संत जिनमणिप्रभ सूरीश्वरजी महाराज ने भी समाज को एकता का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि जैन समुदाय को हिंदू समाज से अलग समझने का प्रयास नहीं करना चाहिए। भारत में रहने वाले सभी लोगों का पहला धर्म इस देश और इसकी संस्कृति से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि जैन धर्म भगवान महावीर की शिक्षाओं को आगे बढ़ाने का मार्ग है, जो अहिंसा और करुणा का संदेश देता है।

स्मारक सिक्का और डाक टिकट का लोकार्पण

कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने जैन समुदाय के दादा गुरुदेव की स्मृति में स्मारक सिक्का और डाक टिकट का लोकार्पण किया। इसके साथ ही डॉ. विद्युत प्रभा द्वारा लिखित पुस्तक ‘दादा गुरुदेव’ का विमोचन भी किया गया।

इस अवसर पर जैसलमेर विधायक छोटू सिंह भाटी, बाड़मेर की प्रसिद्ध हस्तशिल्प कलाकार रुमा देवी सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।

871 साल बाद हो रहा चादर का अभिषेक

चादर महोत्सव इस बार विशेष महत्व रखता है क्योंकि 871 साल बाद दादा गुरुदेव की पावन चादर का विधिवत अभिषेक और दर्शन आयोजित किए जा रहे हैं।

इस ऐतिहासिक अवसर को देखने के लिए देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु जैसलमेर पहुंचे हैं।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जैन संत, साधु-साध्वियां और श्रद्धालु शामिल हुए।


Content Editor

Payal Choudhary

सबसे ज्यादा पढ़े गए

Related News