नीरजा मोदी स्कूल मान्यता विवाद: पढ़ाई के साथ बच्चों की मानसिक सेहत पर संकट, अभिभावकों की बढ़ी चिंता
Friday, Jan 16, 2026-05:43 PM (IST)
जयपुर। शिप्रापथ, मानसरोवर स्थित नीरजा मोदी स्कूल से जुड़ा मान्यता विवाद अब केवल प्रशासनिक या कानूनी मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसका सीधा असर सैकड़ों विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य और मानसिक स्थिति पर पड़ता नजर आ रहा है। स्कूल में वर्षों से पढ़ रहे बच्चों और उनके अभिभावकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बन गया है, जिससे पढ़ाई के साथ-साथ भावनात्मक संतुलन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अभिभावकों का कहना है कि नीरजा मोदी स्कूल उनके बच्चों के लिए सिर्फ एक स्कूल नहीं, बल्कि एक ऐसा सुरक्षित और परिचित शैक्षणिक वातावरण रहा है, जहां बच्चे अनुशासन, स्थिरता और निरंतरता के साथ शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। अचानक मान्यता से जुड़ा विवाद सामने आने और बीच सत्र में स्कूल बदलने की संभावनाओं ने बच्चों को मानसिक तनाव में डाल दिया है। कई अभिभावकों ने बताया कि बच्चे असमंजस और डर के माहौल में पढ़ाई कर रहे हैं, जिसका सीधा असर उनकी एकाग्रता और प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
विशेष रूप से वे विद्यार्थी जो बोर्ड परीक्षाओं या महत्वपूर्ण शैक्षणिक चरणों में हैं, उनके लिए यह स्थिति और भी गंभीर बन गई है। अभिभावकों का मानना है कि इस समय पढ़ाई में किसी भी प्रकार का व्यवधान बच्चों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है। उनका कहना है कि प्रशासनिक निर्णय लेते समय यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि उसका खामियाजा मासूम विद्यार्थियों को न भुगतना पड़े।
अभिभावकों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि स्कूल की मान्यता को लेकर किसी स्तर पर कमियां पाई गई हैं, तो क्या उन्हें सुधारने का अवसर नहीं दिया जा सकता। उनका तर्क है कि सुधारात्मक प्रक्रिया के जरिए स्कूल को आवश्यक मानकों पर लाया जा सकता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रह सके। कई शिक्षाविदों का भी मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में दंडात्मक कार्रवाई से पहले सुधार और संतुलन का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।
इस पूरे प्रकरण को लेकर अभिभावक, शिक्षाविद और सामाजिक संगठन संबंधित प्राधिकरण से मान्यता संबंधी निर्णय पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं। उनकी अपील है कि ऐसा व्यावहारिक और संवेदनशील समाधान निकाला जाए, जिसमें नियमों का पालन भी हो और विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य भी सुरक्षित रहे। फिलहाल, नीरजा मोदी स्कूल से जुड़े इस विवाद ने बच्चों और अभिभावकों दोनों को मानसिक दबाव में डाल दिया है और सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
