जयपुर में बड़ा फैसला: होटलों में सरकारी बैठकों पर रोक, अब सरकारी भवनों में ही होंगे आयोजन!
Thursday, Apr 09, 2026-12:44 PM (IST)
राजस्थान की राजधानी जयपुर में सरकारी खर्च और संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। राज्य के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने एक अहम सर्कुलर जारी करते हुए सरकारी विभागों को निर्देश दिया है कि अब वे सामान्य परिस्थितियों में होटल या निजी स्थानों पर किसी भी प्रकार के कार्यक्रम आयोजित नहीं कर सकेंगे।
इस आदेश के तहत बैठकें, सेमिनार, प्रदर्शनियां और अन्य सरकारी आयोजन अब प्राथमिकता के आधार पर सरकारी भवनों और संस्थानों के कॉन्फ्रेंस हॉल में ही किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और अनावश्यक खर्च पर रोक लगेगी।
सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि राज्य के विभिन्न विभाग, निगम, स्वायत्तशासी संस्थाएं और पीएसयू समय-समय पर कार्यक्रम आयोजित करते रहते हैं। अब इन सभी को निर्देशित किया गया है कि वे उपलब्ध सरकारी सुविधाओं का ही उपयोग करें। इससे न केवल खर्च में कटौती होगी, बल्कि सरकारी ढांचे का भी बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में यदि होटल या किसी निजी स्थान पर आयोजन करना आवश्यक हो, तो इसके लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यह कमेटी मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित की गई है, जिसमें वित्त विभाग के एसीएस या प्रमुख सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के प्रमुख सचिव और संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
इस फैसले के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देना है। अक्सर देखा गया है कि बड़े सरकारी कार्यक्रम होटलों या निजी स्थानों पर आयोजित किए जाते थे, जिससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ता था। अब इस नई व्यवस्था से इस तरह के खर्चों को नियंत्रित किया जा सकेगा।
मुख्य सचिव के सर्कुलर में यह भी उल्लेख किया गया है कि राज्य में कई ऐसे सरकारी संस्थान मौजूद हैं, जहां आधुनिक सुविधाओं से लैस कॉन्फ्रेंस हॉल और ऑडिटोरियम उपलब्ध हैं। इनमें राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, इंदिरा गांधी पंचायतीराज संस्थान, हरिश्चंद्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान और राज्य कृषि प्रबंधन संस्थान जैसे प्रमुख संस्थान शामिल हैं।
सरकार का मानना है कि इन संस्थानों का उपयोग बढ़ाने से उनकी उपयोगिता भी साबित होगी और सरकारी कार्यक्रम अधिक व्यवस्थित तरीके से आयोजित किए जा सकेंगे। साथ ही, इससे स्थानीय स्तर पर सरकारी ढांचे को भी मजबूती मिलेगी।
इस फैसले के बाद अब विभागों को अपने आयोजन की योजना बनाते समय सरकारी परिसरों को प्राथमिकता देनी होगी। केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही निजी स्थानों की अनुमति मिलेगी, वह भी सख्त प्रक्रिया के तहत।
कुल मिलाकर, यह कदम राजस्थान सरकार की वित्तीय अनुशासन और संसाधनों के कुशल प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। आने वाले समय में इससे सरकारी खर्च में कमी आने के साथ-साथ पारदर्शिता भी बढ़ने की उम्मीद है।
