16 घंटे तक आंखों पर पट्टी बांधकर सुनाए Pi के 1 लाख अंक, जयपुर के सुरेश ने रचा इतिहास
Thursday, Mar 26, 2026-06:57 PM (IST)
राजस्थान की राजधानी जयपुर के झोटवाड़ा क्षेत्र से उभरी एक असाधारण प्रतिभा ने आज पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। मंशारामपुरा निवासी सुरेश कुमार शर्मा ने अपनी अद्भुत स्मरण शक्ति के दम पर पाई (Pi) के 1,00,000 अंकों को याद कर, आंखों पर पट्टी बांधकर (Blindfolded) लगातार 16 घंटे 8 मिनट 15 सेकंड तक बिना रुके सुनाकर विश्व स्तर पर इतिहास रच दिया है। यह उपलब्धि केवल एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि मानव मस्तिष्क की असीम क्षमता, अनुशासन और आत्मविश्वास की जीवंत मिसाल है।
उपमुख्यमंत्री द्वारा सम्मान-‘राजस्थान का गौरव’
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने सुरेश कुमार शर्मा को सम्मानित किया और उनकी प्रतिभा की प्रशंसा की। उन्होंने कहा- “सुरेश कुमार शर्मा ने अपनी असाधारण क्षमता से न केवल राजस्थान, बल्कि पूरे भारत का नाम विश्व स्तर पर रोशन किया है। यह उपलब्धि हमारे युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है और मुझे विश्वास है कि आगे भी सुरेश ऐसे ही देश का नाम रोशन करते रहेंगे।
IAS जोगाराम ने भी सराहा बताया ‘अद्वितीय उपलब्धि’
वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी IAS जोगाराम ने भी सुरेश को बधाई देते हुए इसे “मानव मस्तिष्क की असाधारण उपलब्धि” बताया।
तीन अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड बुक्स में दर्ज हुआ नाम
सुरेश कुमार शर्मा की इस उपलब्धि को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली है, International Book of Records, Asia Book of Records, India Book of Records, तीनों प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा गहन सत्यापन के बाद यह रिकॉर्ड आधिकारिक रूप से दर्ज किया गया।

2015 से शुरू हुआ रिकॉर्ड तोड़ने का सफर
सुरेश की यह सफलता वर्षों की मेहनत का परिणाम है। 2015 में उन्होंने पाई की 70,030 digits याद कर चीन का रिकॉर्ड तोड़ा जो आज भी प्रथम स्थान पर कायम है। अब 1,00,000 digits के साथ उन्होंने खुद ही अपने रिकॉर्ड को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया आज उनका यह रिकॉर्ड दुनिया के लिए एक “Benchmark” बन चुका है।
वैश्विक चुनौती, लेकिन रिकॉर्ड अडिग
इस रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए स्वीडन, अमेरिका और चीन के कई प्रतिभाशाली प्रतिभागियों ने प्रयास किए, लेकिन कोई भी इस स्तर तक नहीं पहुंच पाया। अब यह उपलब्धि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक चुनौतीपूर्ण मानक बन चुकी है।
रिकॉर्ड की प्रमुख विशेषताएं
1,00,000 digits of Pi का निरंतर उच्चारण
आंखों पर पट्टी बांधकर प्रस्तुति
16+ घंटे की अविचल एकाग्रता
बिना किसी त्रुटि के प्रदर्शन
अद्भुत मानसिक सहनशक्ति
संघर्ष, अनुशासन और समर्पण की मिसाल
इस सफलता के पीछे: वर्षों की कड़ी मेहनत, हजारों घंटों का अभ्यास, गहरा ध्यान और मानसिक प्रशिक्षण, छिपा हुआ है। “हर दिन खुद को बेहतर बनाना ही असली सफलता है।”

युवाओं के लिए प्रेरणा, देश के लिए गर्व
आज सुरेश कुमार शर्मा लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनकी यह उपलब्धि यह साबित करती है कि “अगर इरादे मजबूत हों, तो मानव मस्तिष्क की कोई सीमा नहीं होती।”
भारत का नाम विश्व मंच पर रोशन
इस उपलब्धि ने न केवल राजस्थान, बल्कि पूरे भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी है। आज सुरेश को “India’s Memory Icon” के रूप में देखा जा रहा है।
अब लक्ष्य और भी बड़ा
सुरेश का लक्ष्य यहीं खत्म नहीं होता। वे आने वाले समय में और भी मेमोरी के क्षेत्र मे बड़े रिकॉर्ड बनाकर भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए तैयार हैं।
