RGHS आंदोलन फेल! जयपुर के बड़े अस्पतालों में इलाज जारी, दवाइयों की सप्लाई भी नहीं रुकी!
Friday, Mar 27, 2026-04:06 PM (IST)
राजस्थान में Rajasthan Government Health Scheme को लेकर कुछ निजी अस्पतालों द्वारा शुरू किया गया आंदोलन अब असरहीन नजर आ रहा है। जहां एक ओर अस्पताल संगठन ने सेवाएं बंद करने का दावा किया था, वहीं दूसरी ओर जयपुर सहित प्रदेश के बड़े अस्पतालों में मरीजों को ओपीडी और आईपीडी दोनों सेवाएं लगातार मिल रही हैं।
अस्पतालों में सेवाएं सामान्य

जयपुर के प्रमुख निजी अस्पतालों में RGHS के तहत इलाज बिना किसी रुकावट के जारी है।
सीतापुरा स्थित महात्मा गांधी हॉस्पिटल में भी मरीजों को ओपीडी और आईपीडी सेवाएं मिल रही हैं।
गोपालपुरा के सी.के. बिरला हॉस्पिटल में भी निर्धारित शुल्क पर इलाज जारी है।
एसआर कल्ला हॉस्पिटल में भी ओपीडी सेवाएं लगातार चल रही हैं।
इन अस्पतालों में हर दिन हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं और उन्हें योजना का लाभ मिल रहा है।
आंदोलन का दावा, लेकिन असर नहीं
राजस्थान एलायंस ऑफ हॉस्पिटल एसोसिएशंस (RAHA) ने 25 मार्च से:
- करीब 700 निजी अस्पतालों में OPD सेवाएं बंद करने
- और 4200 फार्मासिस्ट द्वारा दवाइयों की बिक्री रोकने का दावा किया था
लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आई।
सरकार के आंकड़े क्या कहते हैं?
सरकार द्वारा जारी डेटा के मुताबिक
- 2 दिन में 82 हजार से ज्यादा TID (ट्रांजेक्शन आईडी) जनरेट हुई
- 26 मार्च को
- 24 हजार से ज्यादा मरीजों का इलाज
- 19 हजार से ज्यादा दवा इनवॉइस
यहां तक कि रामनवमी के दिन भी:
- 600 मरीजों ने आईपीडी में इलाज लिया
- 1000 मरीज डे-केयर में
- 23 हजार मरीज ओपीडी में पहुंचे
इससे साफ है कि सेवाएं पूरी तरह चालू रहीं।
क्या होती है TID?
जब कोई मरीज RGHS के तहत इलाज के लिए अस्पताल जाता है:
- पहले उसकी Transaction ID (TID) जनरेट होती है
- उसी के आधार पर इलाज का खर्च इंश्योरेंस कंपनी को भेजा जाता है
यह पूरी प्रक्रिया सिस्टम की पारदर्शिता सुनिश्चित करती है।
मरीजों को राहत, सिस्टम जारी
हालांकि आंदोलन के कारण कुछ जगहों पर अस्थायी परेशानी की आशंका थी, लेकिन बड़े अस्पतालों और सरकार की सक्रियता से:
✔ इलाज बाधित नहीं हुआ
✔ दवाइयों की सप्लाई जारी रही
✔ मरीजों को योजना का लाभ मिलता रहा
निष्कर्ष
RGHS को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन फिलहाल प्रभावी नहीं दिख रहा।
अस्पतालों में सेवाएं सामान्य हैं
सरकार के आंकड़े भी यही संकेत दे रहे हैं
इससे साफ है कि फिलहाल मरीजों को किसी बड़े संकट का सामना नहीं करना पड़ा।
