RERA का बड़ा फैसला: देरी करने पर बिल्डर देगा 10.80% ब्याज, 7 खरीदारों को दिया जाएगा कब्जा
Thursday, Apr 02, 2026-07:07 PM (IST)
जयपुर। राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी ने घर खरीदारों के हित में बड़ा फैसला सुनाया है। जिसके चलते ‘रवि सूर्या अफोर्डेबल होम्स प्राइवेट लिमिटेड’ के खिलाफ एक साथ 7 मामलों में कड़े आदेश दिए हैं। RERA अथॉरिटी की चेयरपर्सन वीनू गुप्ता ने कहा है कि बिल्डर प्रोजेक्ट में देरी के लिए तकनीकी कारणों या खरीदारों पर दोष डालकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकता। रेरा की ओर से प्रमोटर को निर्देश दिया गया है कि वो सभी 7 खरीदारों को उनके फ्लैट्स का वास्तविक भौतिक कब्जा सौंपे और देरी की अवधि के लिए 10.80% वार्षिक ब्याज का भुगतान करे।
सूर्या रेजीडेंसी प्रोजेक्ट से जुड़ा है मामला
आपको बता दें कि प्रोपर्टी से जुड़ा यह मामला जयपुर के गिरधारीपुरा स्थित ‘सूर्या रेजीडेंसी’ प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जिसमें राम दयाल शर्मा, कृष्णा देवी जाटव, मुरारी लाल मीणा, मोहन लाल मीणा, जोगेंद्र सिंह शेखावत, जमना देवी और सोनिया ने शिकायत दर्ज कराई थी। विक्रय समझौते के मुताबिक सभी आवंटियों को नवंबर 2021 से जून 2022 के बीच कब्जा मिल जाना चाहिए था, लेकिन बिल्डर समय पर प्रोजेक्ट पूरा करने में विफल रहा जिसके चलते फ्लैट खरीदारों को लंबे समय तक मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।
रेरा ने खारिज की दलीलें
इस अहम सुनवाई के दौरान बिल्डर ने ये तर्क दिया कि आवंटियों द्वारा समय पर किश्तों का भुगतान नहीं करने के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ। प्रमोटर ने यह भी दावा किया कि उसने 9 अप्रैल 2025 को अधिभोग प्रमाणपत्र प्राप्त कर लिया है। हालांकि, रेरा ने इन दलीलों को खारिज करते हुए पाया कि प्रमोटर ने भुगतान में कथित देरी के आधार पर कोई वैध ‘कैंसलेशन नोटिस’ जारी नहीं किया था और न ही ओसी प्राप्त होने के बाद कब्जे का प्रस्ताव भेजा गया।
10.80% वार्षिक ब्याज के भुगतान का आदेश
अथॉरिटी ने अपने अंतिम आदेश में स्पष्ट किया कि प्रमोटर कब्जे की निर्धारित तिथि से लेकर 9 अप्रैल 2025 तक की अवधि के लिए 10.80% वार्षिक ब्याज का भुगतान करेगा। इस आदेश में यह भी कहा गया कि इस ब्याज राशि को आवंटियों की बकाया राशि (यदि कोई हो) में समायोजित किया जा सकता है और यदि ब्याज अधिक बनता है तो अतिरिक्त राशि लौटानी होगी। यह फैसला उन बिल्डरों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है जो परियोजनाओं में देरी कर खरीदारों को उनके अधिकारों से वंचित करते हैं।
