राजस्थान में कम बारिश से सूखे के हालात! गहलोत ने भजनलाल सरकार को दी ये नसीहत

Thursday, Sep 17, 2026-06:43 PM (IST)

जयपुर। राजस्थान में कम बारिश ने चिंता बढ़ा दी है। मानसूनी सीजन अपने अंतिम दौर में है और प्रदेश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश के कारण खेती, जलाशयों और आने वाले दिनों में पेयजल व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान की भजनलाल सरकार से तत्काल तैयारी करने और प्रभावित इलाकों में राहत कदम उठाने की मांग की है।

 

गहलोत ने कहा कि आधे से अधिक राजस्थान में सूखे जैसे हालात दिखाई दे रहे हैं। उनके मुताबिक कई बांध पूरी तरह नहीं भर पाए हैं और कम बारिश का असर किसानों की फसलों पर भी पड़ा है। उन्होंने सरकार से मौजूदा स्थिति को गंभीरता से लेते हुए समय रहते आवश्यक कदम उठाने की अपील की है।

 

गहलोत ने आरोप लगाया कि अभी तक सूखा प्रभावित इलाकों की स्थिति का पर्याप्त सर्वे नहीं कराया गया है और राहत पैकेज को लेकर भी कोई स्पष्ट पहल सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रभावित किसानों की स्थिति का आकलन कर उन्हें राहत देने की दिशा में काम करना चाहिए। यह बयान उन्होंने 16 सितंबर को जारी किया।

 

इससे पहले भी गहलोत सितंबर की शुरुआत में राजस्थान के एक दर्जन से अधिक जिलों में सूखे जैसे हालात का मुद्दा उठा चुके हैं। उन्होंने उस समय कहा था कि कम बारिश के कारण ग्वार, मूंग, मोठ और बाजरा जैसी खरीफ फसलों पर असर पड़ रहा है। उन्होंने फसल खराबे का सर्वे कराने, प्रभावित किसानों को मुआवजा देने और पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराने की मांग भी की थी।

 

बारिश की कमी का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं है। कम बारिश होने से जलाशयों में पानी की आवक प्रभावित हो सकती है और इसका असर रबी सीजन की सिंचाई पर भी पड़ सकता है। राजस्थान जैसे राज्य में मानसून के दौरान होने वाली बारिश खेती और जल स्रोतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन दस्तावेज में भी कम जलाशय स्तर, ग्रामीण पेयजल स्रोतों का सूखना और रबी सीजन में जलाशयों का सामान्य से कम स्तर सूखे के शुरुआती संकेतकों में शामिल हैं।

 

मौसम की स्थिति को देखें तो इस साल देशभर में भी मानसून सामान्य से कमजोर रहा है। भारत मौसम विभाग के अनुसार सितंबर के मध्य तक देश में मानसूनी बारिश सामान्य से नीचे रही और पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी करीब 19 सितंबर से शुरू होने की संभावना जताई गई थी। ऐसे में अब बारिश के लिए उपलब्ध समय भी सीमित होता जा रहा है।

 

राजस्थान में कम बारिश का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ सकता है। खरीफ फसल को नुकसान होने की स्थिति में किसानों के सामने रबी की बुवाई के लिए बीज, खाद और खेती की लागत जुटाने की चुनौती भी खड़ी हो सकती है। गहलोत ने इसी को लेकर सरकार से समय रहते सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

 

वहीं, आने वाले समय में पीने के पानी और सिंचाई के पानी को लेकर भी प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ सकती है। जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं होने की स्थिति में ग्रामीण और शहरी पेयजल आपूर्ति की योजना बनाना जरूरी होगा। इसके साथ ही किसानों के लिए सिंचाई की उपलब्धता और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण मुद्दे बन सकते हैं।

 

हालांकि, बारिश की स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं है और सितंबर के दौरान कुछ इलाकों में बारिश का दौर भी जारी रहा है। ऐसे में अंतिम स्थिति मानसून सीजन समाप्त होने के बाद ही अधिक स्पष्ट होगी। फिलहाल गहलोत की मांग ने राजस्थान में कम बारिश, किसानों की फसल और जल संकट के मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।


Content Editor

Anil Jangid

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