जयपुर के पुरोहितजी के कटले में फिर लगी आग, 6 साल में तीसरा बड़ा अग्निकांड; सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

Thursday, Sep 17, 2026-06:58 PM (IST)

जयपुर: जयपुर के ऐतिहासिक परकोटे में गुरुवार सुबह पुरोहितजी के कटले और उससे सटे मणिहारों के कटले में एक बार फिर भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। आग की सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू की गई। इस घटना ने एक बार फिर जयपुर के पुराने बाजारों में आग से सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

पुरोहितजी का कटला जयपुर के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में दुकानें हैं और कपड़े, प्लास्टिक, चूड़ियों, शादी-ब्याह से जुड़े सामान समेत कई तरह के ज्वलनशील सामान का कारोबार होता है। बाजार की संकरी गलियां और दुकानों के बाहर रखा सामान आग लगने की स्थिति में चुनौती को और बढ़ा देता है।

 

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पिछले छह वर्षों में पुरोहितजी के कटले में यह तीसरी बड़ी आग बताई जा रही है। इससे पहले जुलाई 2020 में बाजार में आग लगी थी, जिसमें लाखों रुपये के नुकसान की बात सामने आई थी। इसके बाद अक्टूबर 2022 में दीपावली से ठीक पहले भी आग ने बाजार को अपनी चपेट में लिया था। अब एक बार फिर आग लगने से सवाल उठ रहा है कि पिछली घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए किए गए इंतजाम कितने प्रभावी साबित हुए।

 

पुरोहितजी के कटले में 535 से अधिक दुकानें होने की जानकारी सामने आ रही है। बाजार में कई जगह रास्ते बेहद संकरे हैं। बताया जाता है कि कुछ स्थानों पर रास्तों की चौड़ाई करीब पांच फीट तक है। इसके अलावा दुकानों के बाहर सामान रखने और अतिक्रमण के कारण ये रास्ते और संकरे हो जाते हैं। ऐसे में किसी आपात स्थिति में दमकल वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बन सकता है।

 

आग से सुरक्षा के लिए यहां करोड़ों रुपये की व्यवस्था किए जाने की बात भी सामने आई है। करीब 3.90 करोड़ रुपये की लागत से हाइड्रेंट पंप हाउस, लगभग सात किलोमीटर लंबी पाइपलाइन, 2.10 लाख लीटर क्षमता का टैंक और 24 घंटे निगरानी जैसी व्यवस्थाएं तैयार की गई हैं। पुरोहितजी के कटले में 14 हाइड्रेंट लगाए जाने की जानकारी भी है।

 

हालांकि, आग की घटना के बाद इन व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। व्यापारियों की ओर से कुछ हाइड्रेंट के वाल्व और कपलिंग गायब होने जैसे आरोप लगाए जाने की बात सामने आई है। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो पूरे फायर सेफ्टी सिस्टम की जांच और नियमित निरीक्षण की जरूरत है। ऐसे मामलों में सिर्फ कागजी रिकॉर्ड के बजाय मौके पर व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की जांच महत्वपूर्ण होगी।

 

इस घटना के बाद प्रशासन के सामने चुनौती केवल आग पर काबू पाने तक सीमित नहीं है। बाजार में फायर ऑडिट नियमित रूप से कराने, हाइड्रेंट की जांच करने, अतिक्रमण हटाने, आपातकालीन रास्तों को खुला रखने और ज्वलनशील सामान के भंडारण को लेकर नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

 

गनीमत रही कि आग सुबह करीब 7 बजे लगी। इस समय बाजार में सामान्य कारोबारी गतिविधियां शुरू नहीं हुई थीं। यदि इसी तरह की आग शाम के समय लगती, जब बाजार में दुकानें खुली रहती हैं और बड़ी संख्या में ग्राहक व व्यापारी मौजूद होते हैं, तो स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती थी। संकरी गलियों में भीड़ और वाहनों की आवाजाही के कारण दमकल वाहनों की पहुंच भी प्रभावित हो सकती है।

 

जयपुर का परकोटा शहर की ऐतिहासिक पहचान के साथ-साथ हजारों लोगों की रोजी-रोटी का केंद्र है। ऐसे में बार-बार होने वाली आग की घटनाएं केवल संपत्ति के नुकसान का मामला नहीं हैं, बल्कि लोगों की सुरक्षा से भी जुड़ी हैं।


Content Editor

Anil Jangid

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