राजस्थानी कला-संस्कृति के ‘सदी के महानायक’ थे केसी मालू: वासुदेव देवनानी, 6 हजार से अधिक स्मृति संदेशों से सजा विशेषांक

Thursday, Oct 01, 2026-08:21 AM (IST)

जयपुर। राजस्थानी कला, लोकसंगीत और संस्कृति को देश-दुनिया में नई पहचान दिलाने वाले राजस्थान रत्न स्वर्गीय केसी मालू की स्मृति को समर्पित ‘स्वर सरिता भावांजलि विशेषांक’ का जयपुर में लोकार्पण किया गया। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी सहित कई विशिष्ट अतिथियों ने विशेषांक का विमोचन किया।

समारोह में राजस्थान धरोहर प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत, सिविल लाइन्स विधायक गोपाल शर्मा, संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष रमेश बोराणा, वरिष्ठ कला-संस्कृति व्यक्तित्व अशोक पंड्या सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। इस दौरान केसी मालू की धर्मपत्नी फूल देवी मालू, परिवार के सदस्य तथा राजनीति, प्रशासन, कला, संस्कृति, संगीत, साहित्य और उद्योग जगत से जुड़े लोग भी उपस्थित रहे।

देवनानी बोले- केसी मालू थे ‘सदी के महानायक’

राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने स्वर्गीय केसी मालू को राजस्थानी कला एवं संस्कृति के क्षेत्र का ‘सदी का महानायक’ बताया। उन्होंने कहा कि केसी मालू ने अपना पूरा जीवन कला, संस्कृति और लोकसंगीत को समर्पित किया।

देवनानी के मुताबिक, केसी मालू ने अनेक कलाकारों को मंच, अवसर और पहचान दिलाने का काम किया। आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जिन कलाकारों को उन्होंने तैयार किया और राजस्थानी कला-संस्कृति के लिए जो कार्य किया, उसके माध्यम से उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।

कलाकारों को आगे बढ़ाना मालू की प्राथमिकता थी

सिविल लाइन्स विधायक गोपाल शर्मा ने केसी मालू से जुड़े संस्मरण साझा करते हुए कहा कि मालू हमेशा कलाकारों को आगे बढ़ाने और उन्हें उचित मंच उपलब्ध कराने के पक्षधर रहे।

उन्होंने कहा कि पद्मश्री दिए जाने की चर्चा के दौरान भी केसी मालू का विचार था कि सम्मान उन्हें नहीं बल्कि उन कलाकारों को मिलना चाहिए, जिन्हें उन्होंने तैयार किया। शर्मा ने कहा कि मालू द्वारा तैयार किए गए कई कलाकारों को बाद में पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

गोपाल शर्मा ने कहा कि केसी मालू ने राजस्थान के पारंपरिक लोकगीतों को सहेजने, संग्रहित करने और संगीत के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।

राजस्थान के लोकसंगीत को देश-दुनिया तक पहुंचाया

राजस्थान धरोहर प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत ने कहा कि केसी मालू ने राजस्थान की संगीत विरासत को सहेजने के साथ उसे आमजन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण काम किया।

उन्होंने कहा कि केसी मालू ने राजस्थानी संगीत को देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पहचान दिलाई। उनका कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

पिता के अधूरे सपनों को पूरा करना लक्ष्य: हेमजीत मालू

वीणा ग्रुप के प्रबंध निदेशक हेमजीत मालू समारोह में अपने पिता को याद करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उनके पिता के अधूरे सपनों को पूरा करना ही उनका लक्ष्य है।

हेमजीत मालू ने कहा कि केसी मालू दूरदृष्टि और भविष्य की सोच रखने वाले व्यक्तित्व थे। वे हमेशा ‘काम की साधना’ पर जोर देते थे। उन्होंने कहा कि परिवार उनके विचारों, आदर्शों और कार्यशैली के अनुरूप उनकी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

केसी मालू के छोटे भाई वरिष्ठ अधिवक्ता निर्मल कुमार मालू और पुत्र प्रसेनजित मालू ने भी कहा कि परिवार उनके मूल्यों, संस्कारों और विरासत को आगे बढ़ाने के लिए लगातार कार्य करता रहेगा।

6 हजार से ज्यादा स्मृति संदेशों से तैयार हुआ विशेषांक

करीब 200 पृष्ठों के ‘स्वर सरिता भावांजलि विशेषांक’ में देश-विदेश से ई-मेल और डाक के माध्यम से प्राप्त 6 हजार से अधिक स्मृति संदेशों में से चयनित करीब 400 से 500 श्रद्धांजलि और संस्मरण संदेश शामिल किए गए हैं।

विशेषांक को तैयार करने में करीब दो महीने का समय लगा। इसमें केसी मालू के व्यक्तित्व, कृतित्व, संगीत साधना तथा राजस्थान की कला, संस्कृति और लोकसंगीत के लिए उनके योगदान को संस्मरणों और श्रद्धांजलि संदेशों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

समारोह के दौरान विशेषांक तैयार करने वाली टीम को राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सम्मानित भी किया।

कला और संस्कृति जगत की कई हस्तियां रहीं मौजूद

कार्यक्रम में पूर्व राजस्थान मंत्री शांति धारीवाल और बी.डी. कल्ला, पूर्व जयपुर महापौर ज्योति खंडेलवाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव पवन कुमार गोयल, एम.एस. बिस्सा, राजेंद्र भणावत, राजस्थान चेम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष के.एल. जैन, फोर्टी के कार्यकारी अध्यक्ष अरुण अग्रवाल, सेवानिवृत्त जे.सी. मोहंती, उद्योगपति अनूप भारतीया, अजय चोपड़ा, पद्मश्री अहमद हुसैन, मोहम्मद हुसैन, पद्मश्री तिलक गीताई, पद्मश्री साकर अली, उद्यमी सौरभ कक्कड़ और कमल चंद सुराणा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

‘स्वर सरिता’ के प्रबंध निदेशक हेमजीत मालू, संपादकीय एवं आयोजन टीम से डॉ. देवदत्त शर्मा, गोपेन्द्र नाथ भट्ट, डॉ. ओपी यादव, पुरुषोत्तम दिवाकर, प्रसेनजित मालू, सुर संगम के राष्ट्रीय सचिव मुकेश अग्रवाल, भारतीय भाषा एवं संस्कृति संगम के अध्यक्ष कुमेश जैन, राजेश अग्रवाल और अशोक यादव सहित मालू परिवार के सदस्यों एवं सहयोगियों ने विशेषांक के प्रकाशन और समारोह के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम का संचालन प्रणय भारद्वाज ने किया, जबकि अंत में प्रसेनजित मालू ने आभार व्यक्त किया।

वक्ताओं ने कहा कि केसी मालू की सबसे बड़ी विरासत केवल उनका रचनात्मक कार्य नहीं है, बल्कि वे कलाकार और सांस्कृतिक परंपराएं भी हैं, जिन्हें उन्होंने संरक्षण, मंच और पहचान देकर आगे बढ़ाया। यह विरासत आने वाली पीढ़ियों तक राजस्थान की कला, लोकसंगीत और संस्कृति की पहचान को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


Content Editor

Sourabh Dubey

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