70 साल बाद भी पुल नहीं बना! पाली के बूसी गांव के ग्रामीणों ने खुद शुरू किया निर्माण
Saturday, Feb 21, 2026-02:58 PM (IST)
पाली: पाली जिले के सोमेसर कस्बे से जुड़े बूसी गांव में 70 साल बाद भी नदी पर स्थायी पुल नहीं बन पाया है। सुमेर नदी के पार रहने वाले लगभग 200 परिवार हर मानसून में करीब तीन से चार महीने तक अपने घरों में कैद रह जाते हैं। बारिश के दौरान रास्ता बंद हो जाता है और बच्चों को स्कूल भेजने, अस्पताल जाने या मवेशियों का दूध पहुंचाने के लिए उन्हें बहते पानी को पार करना पड़ता है, जिससे उनके जीवन को खतरा रहता है।
ग्रामीणों ने कई बार ग्राम पंचायत, जिला कलेक्टर, क्षेत्रीय विधायक और सांसद तक अपनी समस्या लिखित रूप में पहुंचाई। विडंबना यह है कि गांव को सांसद ने गोद भी लिया था, लेकिन अब तक स्थायी पुल का निर्माण नहीं हो पाया। राज्य सरकार से बजट मिलने की भी उम्मीद थी, लेकिन निराशा हाथ लगी।
इसी कड़ी में ग्रामीणों ने अब जनसहयोग से रपट मार्ग का निर्माण शुरू किया है। निर्माण कार्य की अगुवाई मोहनलाल सीरवी कर रहे हैं। पानी की व्यवस्था का जिम्मा हनुमानराम चौधरी संभाल रहे हैं, जबकि महेंद्रसिंह, राजाराम, भीमराम, सुरेश माली और अन्य भामाशाह इस काम में सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं।
मोहनलाल सीरवी ने बताया कि यह रपट सिर्फ एक रास्ता नहीं, बल्कि उनके बच्चों के भविष्य और मरीजों के लिए जीवनदान है। ग्रामीणों की यह पहल दिखाती है कि जब सरकारी मदद न मिलती हो, तब भी सामूहिक प्रयास और जनसहयोग से बुनियादी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।
ग्रामीणों ने इस काम को अपने सामुदायिक जिम्मेवारियों के तहत शुरू किया है, ताकि अगले मानसून में 200 परिवार सुरक्षित रूप से स्कूल, अस्पताल और बाज़ार तक जा सकें। इस पहल से यह संदेश भी मिलता है कि स्थानीय लोग स्वयं भी अपने विकास और सुरक्षा के लिए सक्रिय हो सकते हैं।
पाली जिले के बूसी गांव की यह कहानी विकास और संघर्ष की मिसाल बन गई है। यह दिखाती है कि सरकारी इंतजार के बजाय अगर समुदाय स्वयं प्रयास करे तो जीवन को सहज और सुरक्षित बनाया जा सकता है।
