फेल होकर कोटा से लौट गए थे घर, जानिए कैसे MBBS से IAS बने पाली कलेक्टर डॉ. गोस्वामी
Saturday, Apr 04, 2026-06:14 PM (IST)
पाली: डॉ. रविंद्र गोस्वामी की सफलता की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। यह कहानी है संघर्ष, समर्पण और कड़ी मेहनत की। वे आज पाली जिले के कलेक्टर के रूप में प्रशासनिक सेवा में हैं, लेकिन उनका सफर आसान नहीं था। कोटा में मेडिकल की तैयारी करते समय पहली असफलता के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपने सपनों को पूरा करने के लिए निरंतर मेहनत की।
साल 2001 में डॉ. गोस्वामी कोटा पहुंचे थे, जहां उन्होंने मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी शुरू की थी। पहले प्रयास में असफलता मिलने पर वे निराश हुए और घर लौट गए। लेकिन उनके अंदर कभी हार मानने का जज्बा नहीं था। दूसरे प्रयास में उन्होंने शानदार सफलता प्राप्त की और जयपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की।
एमबीबीएस के बाद, उन्होंने एक निजी अस्पताल में नौकरी शुरू की, लेकिन उनका सपना इससे कहीं बड़ा था। डॉक्टरी की नौकरी के साथ-साथ उन्होंने यूपीएससी की कठिन तैयारी जारी रखी। उनकी मेहनत का ही परिणाम था कि 2015 में, पहले प्रयास में ही उन्होंने 152वीं रैंक हासिल की और प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया।
डॉ. गोस्वामी का मानना है कि असफलता का मतलब यह नहीं है कि आपने मेहनत नहीं की, बल्कि यह महज एक प्रतियोगिता का हिस्सा है। वे युवाओं को यही सलाह देते हैं कि निराश होने के बजाय लगातार कोशिश करते रहें और हर परिस्थिति में एक बैकअप प्लान तैयार रखें।
आज डॉ. गोस्वामी पाली जिले के कलेक्टर हैं। उन्होंने हाल ही में पाली कलेक्टर कार्यालय में पदभार संभाला। अपने नए पद की जिम्मेदारी के तहत उन्होंने जिले के विकास कार्यों को गति देने और प्रशासन को संवेदनशील बनाने की बात कही। वे पाली जिले में पानी की किल्लत को प्राथमिकता से हल करने के लिए पुख्ता इंतजाम करने का संकल्प ले चुके हैं।
डॉ. गोस्वामी की यह प्रेरणादायक कहानी साबित करती है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है।
