पाली में ''जय-वीरू'' जैसी दोस्ती की अमर कहानी: एक सहेली की मौत के 5 घंटे बाद दूसरी ने भी त्यागा शरीर, एक ही चिता पर हुई विदाई
Thursday, Apr 09, 2026-03:59 PM (IST)
पाली: राजस्थान के पाली जिले के तखतगढ़ कस्बे से एक ऐसी भावनात्मक और दिल छूने वाली घटना सामने आई है, जिसने दोस्ती के वास्तविक अर्थों को फिर से जीवित कर दिया। अक्सर फिल्मों में हम 'जय-वीरू' जैसी अटूट दोस्ती के किस्से सुनते हैं, लेकिन पाली में जेठी बाई और भीकी बाई ने इसे हकीकत में बदल दिया। सात दशकों से ज्यादा का समय एक साथ बिताने वाली इन दोनों सहेलियों की दोस्ती इतनी गहरी थी कि मौत भी उन्हें अलग नहीं कर पाई।
तखतगढ़ के नागचौक इलाके की रहने वाली 80 वर्षीय जेठी बाई और 82 वर्षीय भीकी बाई के बीच की दोस्ती मोहल्ले में एक मिसाल बन चुकी थी। दोनों का पीहर एक ही जालोर जिले के आहोर क्षेत्र में था और ससुराल आने के बाद भी उनका साथ कभी नहीं छूटा। मोहल्ले के लोग बताते हैं कि ये दोनों अक्सर मजाक में कहती थीं, "हममें से जो भी पहले जाए, वो दूसरी को अपने साथ लेकर जाए।" और नियति ने उनकी यह बात सच कर दी।
सदमे ने ली भीकी बाई की जान
शनिवार रात को जेठी बाई की तबीयत बिगड़ने पर उनका निधन हो गया। रविवार सुबह जब भीकी बाई को यह दुखद खबर मिली, तो वह इसे सहन नहीं कर पाई और कुछ ही घंटों बाद, 8 बजे के करीब, महज 5 घंटे बाद उन्होंने भी दम तोड़ दिया। उनके बेटे हंसाराम ने बताया कि भीकी बाई को कोई गंभीर बीमारी नहीं थी, लेकिन सहेली के खोने का सदमा इतना गहरा था कि वह खुद को संभाल नहीं पाई।
एक ही चिता पर अंतिम विदाई
दो अर्थियों को एक साथ श्मशान घाट पहुंचते देख वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों में आंसू थे। दोनों परिवारों ने आपसी सहमति से फैसला लिया कि जब यह दोनों ताउम्र साथ रहीं, तो इनका अंतिम संस्कार भी एक साथ ही होना चाहिए। श्मशान घाट में एक ही चिता सजाई गई और दोनों सहेलियों को एक साथ मुखाग्नि दी गई। यह दृश्य श्मशान में मौजूद सभी लोगों के लिए अविश्वसनीय और भावुक था।
दोस्ती की जीत, मौत की हार
पाली के तखतगढ़ में हुई इस घटना ने साबित कर दिया कि सच्ची दोस्ती केवल खून के रिश्तों से नहीं, बल्कि गहरे अहसासों और प्यार से बनती है। इसने यह भी दिखाया कि एक सच्ची दोस्ती का कोई अंत नहीं होता, चाहे समय और हालात कुछ भी हों। यह कहानी हमेशा के लिए याद रखी जाएगी, जहाँ दोस्ती ने मौत को हराया और दोस्ती की मिसाल दी।
