जहरीली लूणी नदी पर हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी: जोधपुर–पाली–बालोतरा के लोगों के अस्तित्व का सवाल
Friday, Jan 16, 2026-04:06 PM (IST)
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने लूणी नदी में औद्योगिक इकाइयों द्वारा छोड़े जा रहे जहरीले और खतरनाक अपशिष्ट को लेकर राज्य सरकार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति विनीत कुमार माथुर और न्यायमूर्ति चंद्र शेखर शर्मा की खंडपीठ ने साफ शब्दों में कहा कि यह मामला केवल पर्यावरण संरक्षण का नहीं, बल्कि लूणी नदी के किनारे बसे जोधपुर, पाली और बालोतरा जिलों के शहरों और गांवों में रहने वाले हजारों लोगों के अस्तित्व से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन चुका है।
खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि लूणी नदी और उससे जुड़े खेतों में लगातार जहरीले व हानिकारक रसायनों का निर्वहन किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में व्यापक तबाही मच रही है। खेती योग्य भूमि बंजर होती जा रही है, भूमिगत जल प्रदूषित हो चुका है और ग्रामीण आबादी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रही है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की निष्क्रियता और ढिलाई न्यायालय के लिए अत्यंत चिंताजनक है।
यह जनहित याचिका सांवलराम की ओर से अधिवक्ता दिव्यमान सिंह राठौड़ ने दायर की है। याचिका में बताया गया कि औद्योगिक इकाइयां नियमों को ताक पर रखकर रसायनिक अपशिष्ट लूणी नदी में छोड़ रही हैं, जिससे नदी का प्राकृतिक स्वरूप नष्ट हो रहा है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि पूर्व में कई बार निर्देश दिए जाने के बावजूद राज्य के संबंधित अधिकारी अपेक्षित संवेदनशीलता और तत्परता नहीं दिखा पाए हैं, जो शासन-प्रशासन की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है जब राज्य सरकार, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला प्रशासन और औद्योगिक इकाइयों को मिलकर ठोस और प्रभावी कदम उठाने होंगे। अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार की शिथिलता सीधे तौर पर आमजन के स्वास्थ्य, आजीविका और जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता सज्जन सिंह राठौड़ ने अदालत को आश्वासन दिया कि दोषी औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही लूणी नदी प्रदूषण रोकने के लिए विस्तृत स्थिति रिपोर्ट और कार्ययोजना अगली सुनवाई में पेश की जाएगी। वहीं, एक प्रतिवादी की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
हाईकोर्ट ने सभी पक्षकारों से अपेक्षा जताई है कि वे मामले की गंभीरता को समझते हुए ईमानदार और प्रभावी प्रयास करेंगे। इस महत्वपूर्ण जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 5 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।
