विधानसभा में कोर्ट को लेकर तीखी तकरार, विपक्ष बोला–बहानेबाजी छोड़ो; कानून मंत्री ने कहा–5 साल में रचेंगे इतिहास
Tuesday, Feb 03, 2026-02:46 PM (IST)
जयपुर। राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को न्यायिक ढांचे और अदालतों की स्थापना को लेकर सदन में तीखी बहस देखने को मिली। झालावाड़ जिले के खानपुर क्षेत्र में एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) कोर्ट खोलने की मांग को लेकर कांग्रेस विधायक सुरेश गुर्जर और कानून मंत्री जोगाराम पटेल आमने-सामने आ गए। बहस इतनी बढ़ी कि नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और सत्ता पक्ष के अन्य सदस्य भी इसमें कूद पड़े, जिससे सदन का माहौल गर्मा गया।
प्रश्नकाल के दौरान विधायक सुरेश गुर्जर ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि खानपुर में ACJM कोर्ट खोलने का प्रस्ताव भेजे हुए 9 साल हो चुके हैं। क्षेत्र में 4700 से अधिक सिविल और क्रिमिनल मामले लंबित हैं और कोर्ट भवन भी बनकर तैयार है। इसके बावजूद अब तक कोर्ट शुरू नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने पूछा कि क्या आने वाले बजट में इस कोर्ट को खोलने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास है।
इस पर जवाब देते हुए कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि खानपुर में ACJM कोर्ट खोलने का प्रस्ताव 8 दिसंबर 2014 को हाई कोर्ट को भेजा गया था, लेकिन अब तक वहां से स्वीकृति नहीं मिली है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार एक बार फिर हाई कोर्ट से सहमति के लिए अनुरोध करेगी।
इसके बाद विधायक ने मंत्री से पिछले दो वर्षों में खोले गए कोर्ट की संख्या और भेजे गए प्रस्तावों का ब्यौरा मांगा। मंत्री ने कहा कि कोर्ट खोलने की प्रक्रिया में समय-समय पर रिकमेंडेशन भेजी जाती हैं और इसका कोई तय आंकड़ा नहीं होता। जैसे ही प्रस्ताव स्वीकृत होते हैं, कोर्ट खोल दिए जाते हैं।
इसी दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने हस्तक्षेप करते हुए सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब बिल्डिंग और लंबित मामलों की संख्या मौजूद है, तो सरकार बहाने क्यों बना रही है। इस पर सत्ता पक्ष के सदस्य खड़े हो गए और सदन में शोरगुल बढ़ गया।
पलटवार करते हुए कानून मंत्री ने आंकड़े पेश किए और कहा कि मौजूदा सरकार ने 9 जिला एवं सत्र न्यायालय, 7 ACB कोर्ट, 7 ACJM कोर्ट और 8 CJM कोर्ट खोले हैं, जबकि पिछली सरकार का रिकॉर्ड इससे कहीं कम रहा है। मंत्री ने दावा किया कि सरकार का लक्ष्य त्वरित, सस्ता और सुलभ न्याय देना है और अगले 5 वर्षों में न्यायिक व्यवस्था के क्षेत्र में इतिहास रचा जाएगा।
