चंबल के पानी पर राजस्थान-MP में तकरार, किसानों ने 13 जुलाई को महापड़ाव का किया ऐलान

Friday, Jul 10, 2026-03:17 PM (IST)

जयपुर। राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच चंबल नदी के पानी को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। खरीफ सीजन में धान सहित अन्य फसलों की सिंचाई के लिए राजस्थान सरकार ने मध्यप्रदेश से गांधी सागर बांध से एक माह तक 6000 क्यूसेक पानी छोड़ने का आग्रह किया था, लेकिन अब तक इस मांग पर कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है। पानी नहीं मिलने से कोटा और बूंदी के किसानों में नाराजगी बढ़ गई है, जिसके चलते किसानों ने 13 जुलाई को कोटा स्थित सीएडी कार्यालय पर महापड़ाव करने की घोषणा की है।

 

राजस्थान के सीएडी विभाग के मुख्य अभियंता एवं अतिरिक्त सचिव संदीप माथुर ने 6 जुलाई को मध्यप्रदेश के जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता (नर्मदा-ताप्ती बेसिन), उज्जैन को पत्र भेजकर गांधी सागर बांध से 6000 क्यूसेक पानी छोड़ने का अनुरोध किया था। प्रस्ताव के अनुसार, इस पानी में से 4500 क्यूसेक कोटा बैराज की दाईं मुख्य नहर और 1500 क्यूसेक बाईं मुख्य नहर के लिए उपयोग किया जाना था, ताकि खरीफ फसलों की सिंचाई सुचारु रूप से हो सके।

 

हालांकि, राजस्थान सरकार का कहना है कि पत्र भेजे जाने के कई दिन बाद भी मध्यप्रदेश की ओर से कोई औपचारिक जवाब नहीं मिला है। सीएडी कोटा के अधीक्षण अभियंता संजय सिंह ने बताया कि विभाग लगातार मध्यप्रदेश के अधिकारियों के संपर्क में है, लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अब इस विषय पर दोनों राज्यों के बीच उच्च स्तर पर बातचीत जारी है।

 

बताया जा रहा है कि इस विवाद की पृष्ठभूमि जून माह की एक घटना से जुड़ी है। उस समय मध्यप्रदेश सरकार ने चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के तहत स्थापित लिफ्ट इरिगेशन पाइपलाइन नेटवर्क की टेस्टिंग के लिए राजस्थान से 10 से 24 जून तक दाईं मुख्य नहर के पार्वती एक्वाडक्ट से 1200 क्यूसेक पानी छोड़ने का अनुरोध किया था। राजस्थान ने उस समय अपनी आवश्यकताओं का हवाला देते हुए पानी उपलब्ध नहीं कराया था। अब जब राजस्थान ने खरीफ फसलों के लिए पानी मांगा है, तो मध्यप्रदेश की ओर से भी अब तक सहमति नहीं दी गई है।

 

इस बीच पानी की कमी को लेकर किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है। उनका कहना है कि समय पर सिंचाई नहीं मिलने से धान और अन्य खरीफ फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी मांग को लेकर किसान संगठनों ने 13 जुलाई को कोटा में सीएडी कार्यालय पर महापड़ाव करने का निर्णय लिया है। अब किसानों और कृषि क्षेत्र की नजर दोनों राज्यों के बीच चल रही उच्च स्तरीय वार्ता पर टिकी हुई है, जिससे इस विवाद का समाधान निकलने की उम्मीद की जा रही है।


Content Editor

Anil Jangid

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