राजस्थान में बदलेंगे भवन निर्माण के नियम, बड़े भवनों में सोलर सिस्टम और ईवी चार्जिंग स्टेशन होंगे अनिवार्य
Thursday, Jul 09, 2026-03:22 PM (IST)
जयपुर। राजस्थान में ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण अनुकूल भवनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भवन निर्माण नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार राजस्थान एनर्जी कंजर्वेशन एंड सस्टेनेबल बिल्डिंग कोड-2026 लागू करने की दिशा में काम कर रही है। इस प्रस्तावित कोड के तहत बड़े व्यावसायिक और संस्थागत भवनों में ऊर्जा दक्षता, नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ी सुविधाओं को अनिवार्य बनाया जाएगा।
राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम द्वारा तैयार किए जा रहे इस कोड के प्रारूप पर चर्चा के लिए जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) में बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और संबंधित हितधारकों ने भाग लिया तथा प्रारूप में शामिल प्रावधानों, सुझावों और आपत्तियों पर विस्तार से चर्चा की। अधिकारियों के अनुसार, प्राप्त सुझावों के आधार पर अंतिम मसौदे में आवश्यक संशोधन भी किए जा सकते हैं।
प्रस्तावित नियम मुख्य रूप से बड़े भवनों पर लागू होंगे। इसके तहत 2,000 वर्गमीटर या उससे अधिक बिल्ट-अप एरिया वाले भवन, 100 किलोवाट या उससे अधिक कनेक्टेड लोड वाले भवन तथा 120 केवीए या उससे अधिक कनेक्टेड डिमांड वाले भवन इस कोड के दायरे में आएंगे।
कोड में ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण अनुकूल भवनों को प्रोत्साहन देने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। प्रस्ताव के अनुसार, जो भवन 'प्लस' मानकों का पालन करेंगे, उन्हें 5 प्रतिशत अतिरिक्त बिल्ट एरिया रेश्यो (BAR/FAR) का लाभ दिया जाएगा। वहीं, 'सुपर बिल्डिंग' मानकों को पूरा करने वाले भवनों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त बिल्ट एरिया रेश्यो देने का प्रस्ताव रखा गया है।
नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए भवनों में अनुबंधित बिजली मांग का कम से कम 4 प्रतिशत या उपलब्ध रूफटॉप क्षेत्र के 50 प्रतिशत हिस्से का उपयोग सौर ऊर्जा जैसी अक्षय ऊर्जा प्रणालियों के लिए करना होगा। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग को देखते हुए भवनों में ईवी चार्जिंग स्टेशन और आवश्यक पार्किंग सुविधाएं भी विकसित करनी होंगी।
कोड के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक एकीकृत वेब पोर्टल विकसित किया जाएगा, जिसके माध्यम से भवनों की अनुपालना की निगरानी की जाएगी। साथ ही राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम के अधिकृत ऊर्जा ऑडिटर समय-समय पर भवनों का निरीक्षण करेंगे। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट और उल्लंघन की स्थिति में जुर्माने जैसे प्रावधान भी प्रस्तावित किए गए हैं।
यदि यह कोड लागू होता है, तो राजस्थान में भवन निर्माण को अधिक ऊर्जा दक्ष, पर्यावरण अनुकूल और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
