अब प्रेग्नेंट महिलाओं को घर पर मिलेगी सरकारी सेवा, भजनलाल सरकार ने लिया ये बड़ा फैसला

Sunday, Jul 19, 2026-02:33 PM (IST)

जयपुर: राजस्थान में प्रसूताओं की मृत्यु के मामलों और सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से भजनलाल सरकार ने हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं के लिए नई स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इस नई व्यवस्था के तहत उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें समय रहते बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का लक्ष्य मातृ मृत्यु दर में कमी लाना और गर्भवती महिलाओं को समय पर उपचार सुनिश्चित करना है।

 

हाल ही में स्वास्थ्य भवन में आयोजित उच्च स्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएमएचओ) और अस्पताल अधीक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सरकारी अस्पतालों में किसी भी मरीज या गर्भवती महिला की मृत्यु चिकित्सकीय लापरवाही के कारण नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर निगरानी या उपचार में लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों और चिकित्सकों के खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

 

नई व्यवस्था के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों और दूर-दराज की ढाणियों में रहने वाली हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की जिम्मेदारी स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों को सौंपी गई है। प्रत्येक ऐसी महिला को एक समर्पित एएनएम (सहायक नर्स मिडवाइफ) की निगरानी में रखा जाएगा। एएनएम हर तीन दिन में महिला के घर जाकर उसकी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करेगी। इस दौरान रक्तचाप (बीपी), हीमोग्लोबिन, वजन और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य मानकों की जांच की जाएगी। यदि किसी प्रकार की जटिलता सामने आती है तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श और अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

 

सरकार ने सरकारी अस्पतालों के लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर में स्वच्छता, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और आपातकालीन चिकित्सा प्रबंधन को लेकर भी नए कार्य प्रोटोकॉल लागू किए हैं। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं की डिजिटल मैपिंग की जाएगी ताकि उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके। सभी अस्पतालों को अपनी दैनिक गतिविधियों और हाई रिस्क मामलों की रिपोर्ट नियमित रूप से मुख्यालय भेजनी होगी।

 

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि नियमित निगरानी, समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप और जवाबदेही तय होने से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार होगा। सरकार को उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से गर्भवती महिलाओं को घर के नजदीक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी और मातृ मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल होगी।


Content Editor

Anil Jangid

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