जीरो टॉलरेंस पर भजनलाल सरकार का बड़ा एक्शन, कृषि विभाग के 3 अधिकारी किए सस्पेंड
Monday, Jul 06, 2026-03:20 PM (IST)
जयपुर। राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत बड़ा कदम उठाते हुए कृषि विभाग के तीन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। विभागीय जांच में जनता के साथ अशिष्ट व्यवहार, सरकारी कार्यों में गंभीर लापरवाही, भ्रष्ट आचरण और धोखाधड़ी से जुड़े आरोपों के प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई। सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मामला कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के विभाग से जुड़ा हुआ है।
कृषि विभाग के आदेश के अनुसार कृषि पर्यवेक्षक संदीप कुमार, वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक रजनीश कुमार और सहायक कृषि अधिकारी विशाल कुमार को निलंबित किया गया है। ये अधिकारी क्रमशः बीकमपुर, बज्जू और रायसिंहनगर क्षेत्र में कार्यरत थे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन अधिकारियों के खिलाफ लंबे समय से विभिन्न शिकायतों की जांच चल रही थी और प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम-1958 के नियम 13(1) के तहत निलंबन आदेश जारी किया गया।
जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए तीनों अधिकारियों के मुख्यालय भी बदल दिए गए हैं। संदीप कुमार को धौलपुर, रजनीश कुमार को बाड़मेर और विशाल कुमार को बारां जिला परिषद में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें केवल नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा तथा सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।
सरकार का कहना है कि कृषि विभाग से जुड़ी लगातार शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है। किसानों को खाद, बीज, सब्सिडी और अन्य योजनाओं का लाभ दिलाने में किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार स्वीकार नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार किसानों और आम जनता से लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह कार्रवाई की गई है।
दूसरी ओर इस पूरे मामले पर कांग्रेस ने सरकार और कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा पर निशाना साधा है। कांग्रेस का आरोप है कि जिन अधिकारियों को अब भ्रष्टाचार के आरोपों में निलंबित किया गया है, उनका पहले मंत्री की ओर से बचाव किया गया था। पार्टी ने कहा कि यदि आरोप गंभीर हैं तो पूरे कथित नेटवर्क और डिकॉय टीम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कांग्रेस ने कॉल डिटेल, आर्थिक लेन-देन और कथित अवैध वसूली की भी विस्तृत जांच कराने की मांग उठाई है।
हालांकि सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह विभागीय जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर की गई है। अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनिक जांच आगे भी जारी रहेगी और जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इस कार्रवाई को राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त नीति और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सभी की नजर विभागीय जांच और उसके अंतिम निष्कर्ष पर टिकी हुई है।
