जैसलमेर में 25 हजार श्रद्धालुओं के लिए बसी टेंट सिटी: 872 साल पुराने वस्त्रों के दर्शन को पहुंचे विदेशी, 600 शेफ बना रहे भोजन

Saturday, Mar 07, 2026-03:56 PM (IST)

राजस्थान के जैसलमेर में पहली बार इतना बड़ा धार्मिक आयोजन देखने को मिल रहा है, जहां करीब 25 हजार श्रद्धालुओं के लिए एक अस्थायी शहर यानी टेंट सिटी बसाई गई है। यह विशाल व्यवस्था जैन समाज के ऐतिहासिक चादर महोत्सव के लिए की गई है, जो 6 से 8 मार्च तक जैसलमेर के देदांसर मेला ग्राउंड में आयोजित हो रहा है।

इस महोत्सव में देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचे हैं। यहां आने वाले भक्त जैन संत दादा श्री जिनदत्त सूरी महाराज के करीब 872 साल पुराने पवित्र वस्त्रों के दर्शन कर रहे हैं, जो इस आयोजन का मुख्य आकर्षण बने हुए हैं।

मैदान में बनाए गए पांच विशाल डोम

महोत्सव के लिए आयोजन स्थल पर करीब 5 बीघा क्षेत्र में पांच विशाल डोम बनाए गए हैं।

इनमें से मुख्य डोम करीब एक लाख स्क्वायर फीट क्षेत्र में तैयार किया गया है, जहां मुख्य सभा, सामूहिक इकतीसा पाठ और जैन संतों के प्रवचन आयोजित किए जा रहे हैं।

इस मुख्य डोम में करीब 12 हजार श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा यहां एक एसी म्यूजियम भी बनाया गया है, जो श्रद्धालुओं के लिए ज्ञान और अध्यात्म का केंद्र बना हुआ है।

भोजनशाला के लिए अलग डोम

आयोजन स्थल पर दो बड़े डोम विशेष रूप से भोजनशाला के लिए बनाए गए हैं। प्रत्येक डोम लगभग 50-50 हजार स्क्वायर फीट क्षेत्र में तैयार किया गया है।

यहां अक्षय भोजनशाला संचालित की जा रही है, जहां हजारों श्रद्धालुओं के लिए प्रतिदिन भोजन तैयार किया जा रहा है।

600 शेफ की टीम बना रही भोजन

इतने बड़े आयोजन में भोजन व्यवस्था को संभालने के लिए करीब 600 अनुभवी रसोइयों की टीम काम कर रही है।

यहां खाना बनाने के लिए आधुनिक मशीनों के साथ-साथ पारंपरिक चूल्हों का भी उपयोग किया जा रहा है।

श्रद्धालुओं के लिए दिनभर अलग-अलग समय पर भोजन की व्यवस्था की गई है।

नाश्ता:
सुबह दो प्रकार की पारंपरिक मिठाइयों के साथ इडली-सांभर, वड़ा-सांभर, पोहा, जैसलमेर की प्रसिद्ध बाजरे की गांठ और पूरी-सब्जी परोसी जा रही है।

दोपहर का भोजन:
लंच में तीन प्रकार की मिठाइयां, नमकीन, दो प्रकार की सब्जियां (एक रसदार और एक सूखी), दाल और चावल शामिल हैं।

रात का भोजन:
जैन परंपरा के अनुसार सूर्यास्त के बाद हल्का भोजन दिया जा रहा है। इसमें भेलपुरी, डोसा, पूरी, दाल और चावल जैसे व्यंजन शामिल हैं।

आयोजकों का कहना है कि भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

आयोजन के लिए बनाई गई अलग-अलग टीमें

इतने बड़े आयोजन को सफल बनाने के लिए विभिन्न विभाग बनाए गए हैं।

जैन ट्रस्ट के साथ करीब 500 स्वयंसेवकों की टीम भी काम कर रही है, जो आयोजन की पूरी व्यवस्था संभाल रही है।

यह टीम श्रद्धालुओं के प्रवेश, सुरक्षा जांच, जानकारी और अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी निभा रही है।

श्रद्धालुओं को कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी देने और साहित्य वितरित करने के लिए अलग से सूचना डेस्क भी बनाई गई है।

आयोजकों का उद्देश्य

आयोजन समिति के महामंत्री पदमचंद टाटिया के अनुसार इस आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक कार्यक्रम करना नहीं बल्कि जैसलमेर की मेहमाननवाजी को भी दुनिया के सामने प्रस्तुत करना है।

उन्होंने कहा कि यहां आने वाला हर श्रद्धालु भक्ति के साथ-साथ जैसलमेर की अतिथि सत्कार की यादें भी अपने साथ लेकर जाएगा।

वित्त विभाग प्रमुख कुषराज गोलेछा ने बताया कि बेंगलुरु और अन्य महानगरों से आए सहयोगियों की मदद से आयोजन के लिए वित्तीय और संसाधन प्रबंधन को मजबूत किया गया है।

क्यों खास है यह महोत्सव?

इस महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण दादा गुरुदेव के 872 साल पुराने वस्त्र हैं, जिनमें चादर, चोल पट्टा और मुहपत्ति शामिल हैं।

इतिहास के अनुसार विक्रम संवत 1211 में अजमेर में दादा गुरुदेव के स्वर्गवास के बाद उनके अंतिम संस्कार की अग्नि में उनका शरीर तो विलीन हो गया, लेकिन उनके वस्त्र सुरक्षित रह गए थे।

बाद में इन वस्त्रों को गुजरात के पाटन ले जाया गया।

महामारी से जुड़ी मान्यता

करीब 145 साल पहले जैसलमेर में भयंकर महामारी फैली थी, तब यहां के महारावल ने इन पवित्र वस्त्रों को पाटन से जैसलमेर मंगवाया था।

स्थानीय मान्यता के अनुसार इन वस्त्रों के आने के बाद जैसलमेर महामारी से मुक्त हो गया था।

तब से ये पवित्र वस्त्र जैसलमेर के ज्ञान भंडार में सुरक्षित रखे गए हैं।

पहली बार हो रहा ऐसा आयोजन

जैन समाज के इतिहास में इस तरह का चादर महोत्सव पहली बार आयोजित किया जा रहा है

इस ऐतिहासिक आयोजन को देखने और इन पवित्र वस्त्रों के दर्शन करने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु जैसलमेर पहुंचे हैं।


Content Editor

Payal Choudhary

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