9 साल बाद जगी उम्मीद: जैसलमेर-भाभर 380 KM रेल लाइन का ड्रोन सर्वे शुरू, 5000 करोड़ की परियोजना को मिली रफ्तार

Sunday, Mar 01, 2026-05:37 PM (IST)

राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्र में 9 साल से लंबित पड़ी जैसलमेर-भाभर 380 किलोमीटर रेल लाइन परियोजना को आखिरकार नई रफ्तार मिलती दिख रही है। रेल मंत्रालय द्वारा करीब 8 महीने पहले 10 करोड़ रुपए के बजट के साथ ड्रोन और टोपोग्राफिकल सर्वे की स्वीकृति देने के बाद अब फील्ड में सर्वे टीम तैनात कर दी गई है। लंबे इंतजार और विभागीय सुस्ती के बाद इस परियोजना पर जमीन स्तर पर काम शुरू होने की पुष्टि हुई है।

साल 2016 में केंद्र सरकार ने राजस्थान और गुजरात को जोड़ने के उद्देश्य से इस परियोजना के लिए करीब 5000 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी थी। हालांकि घोषणा के बाद से अब तक केवल एक बार प्रारंभिक सर्वे हुआ और निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। अब अंतिम लोकेशन सर्वे (FLS) ड्रोन और डीजीपीएस तकनीक से किया जा रहा है, जिससे जमीन की ऊंचाई, ढलान और भौगोलिक बाधाओं का सटीक डेटा तैयार किया जा सके।

तीन चरणों में पूरी होगी परियोजना

इस रेल लाइन को तीन चरणों में विकसित किया जाएगा:

  • जैसलमेर–बाड़मेर (145 किमी, अनुमानित लागत 517 करोड़)

  • बाड़मेर–भाभर (193.84 किमी, अनुमानित लागत 798 करोड़)

  • थराद रोड–बनासरा (80.75 किमी, अनुमानित लागत 370 करोड़)

कुल मिलाकर 380 किमी लंबी इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 5000 करोड़ रुपए बताई गई है।

31 नए रेलवे स्टेशन प्रस्तावित

परियोजना के तहत कुल 31 रेलवे स्टेशन प्रस्तावित हैं। इनमें जैसलमेर, बखरानी, सांगड़, गूंगा, शिव, निंबला, बाड़मेर, महाबार, उण्डखा, अराबा का तला, सनावड़ा, बाछड़ाऊ, दूदवा, दूदू, धोरीमन्ना, भाउड़ा, माणकी, सिंछावा, पादरड़ी, भादरून, सरवाना, कसवी, रतनपुरा, भोरोल, भाचर, थराद रोड जंक्शन, मोरीखा, सनसेड़ा, कुवाला और भाभर शामिल हैं।

रेलवे प्रशासन ने जैसलमेर, बाड़मेर और जालोर के जिला प्रशासन से सर्वे टीम को सुरक्षा और सहयोग उपलब्ध कराने का आग्रह किया है, ताकि कार्य के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित न हो।

पर्यटन और कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा फायदा

जैसलमेर एक प्रमुख पर्यटन नगरी है और फिलहाल उत्तर भारत से तो सीधी रेल कनेक्टिविटी है, लेकिन दक्षिण भारत से सीधा संपर्क नहीं है। यह रेल लाइन गुजरात के भाभर होते हुए कांडला पोर्ट तक संपर्क को मजबूत करेगी, जिससे व्यापार और पर्यटन दोनों को नई दिशा मिलेगी।

वरिष्ठ मंडल वाणिज्यिक प्रबंधक, रेलवे जोधपुर हितेश यादव के अनुसार, “ड्रोन और डीजीपीएस तकनीक से टोपोग्राफिकल सर्वे किया जा रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद रिपोर्ट उच्च स्तर पर भेजी जाएगी और आगे की कार्रवाई की जाएगी।”

अब सवाल यही है कि क्या 9 साल से अटकी इस परियोजना का निर्माण कार्य भी जल्द शुरू होगा या यह फिर फाइलों में ही सिमट कर रह जाएगा?


Content Editor

Payal Choudhary

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