राजस्थान विधानसभा बजट सत्र में राइट टू हेल्थ मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी झड़प

Thursday, Feb 12, 2026-03:41 PM (IST)

जयपुर। राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को ‘राइट टू हेल्थ’ कानून के नियमों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी झड़प हुई। प्रश्नकाल में कांग्रेस विधायक हरिमोहन शर्मा ने कानून के नियम लागू न होने पर सवाल उठाया। जवाब में स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार यह बिल आचार संहिता से ठीक पहले चुनावी फायदे के लिए लाई थी।

 

जनता को पहले ही मिल रहा मुफ्त इलाज
इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने तंज कसते हुए कहा कि ‘आयुष्मान भारत-मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना’ (मां योजना) के तहत जनता को मुफ्त इलाज मिल रहा है, इसलिए इस कानून की अलग से जरूरत नहीं है। इस बयान पर विपक्ष भड़क उठा। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि वह कानून लागू करना चाहती है या नहीं।

 

कांग्रेस विधायकों का सदन से वॉकआउट
सदन में विवाद बढ़ने पर कांग्रेस विधायक वेल में आकर नारेबाजी करने लगे। हालांकि, स्थिति बिगड़ती देख स्पीकर वासुदेव देवनानी ने कड़ी नाराजगी जताई और चेतावनी दी कि यदि इसी तरह हंगामा जारी रहा तो सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी जाएगी। हालांकि, स्पीकर द्वारा अगला प्रश्न पुकारते ही कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट कर गए। इस घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया कि राइट टू हेल्थ जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव फिलहाल थमने वाला नहीं है।

 

रफीक खान के आरोपों पर सदन में हंगामे के हालात
राजस्थान विधानसभा में शून्यकाल के दौरान जयपुर में मकानों के पट्टों और सीलिंग कार्रवाई में कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठते ही हंगामे के हालात बन गए। कांग्रेस विधायक रफीक खान ने आरोप लगाया कि जयपुर शहर में छोटे मकानों को निशाना बनाकर सील किया जा रहा है, जबकि बड़े बंगलों को छूट दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में निर्माणाधीन मकानों पर अधिकारी कैमरे लेकर पहुंचते हैं और बाद में “सील में डील” की स्थिति बन जाती है।

 

विपक्ष ने भ्रष्टाचार का लगाया आरोप
रफीक खान ने यह भी कहा कि संबंधित विभाग के मंत्री सदन में मौजूद नहीं हैं, जिससे जवाबदेही का अभाव दिखता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में 14 लाख पट्टे दिए गए थे, जबकि वर्तमान सरकार में बिना भ्रष्टाचार के न तो नक्शा पास हो रहा है और न ही पट्टा मिल रहा है। “बिना पैसा दिए कोई व्यक्ति अपनी छत नहीं डाल सकता, एक भी मकान ऐसा नहीं मिलेगा जिसकी छत बिना लेन-देन के बन रही हो,” उन्होंने कहा। साथ ही दावा किया कि उनके पास आरोपों के समर्थन में सबूत मौजूद हैं।


Content Editor

Anil Jangid

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