जयपुर में लोक और समकालीन कला का अनूठा संगम, RIC में शुरू हुआ राष्ट्रीय कला शिविर

Monday, Jun 01, 2026-06:31 PM (IST)

जयपुर। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) और पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (WZCC), उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार से पांच दिवसीय "फोक एंड कंटेम्परेरी आर्ट कैंप" का शुभारंभ हुआ। 1 से 5 जून 2026 तक चलने वाले इस राष्ट्रीय कला शिविर में देश के 14 राज्यों से आए 20 प्रतिष्ठित कलाकार भाग ले रहे हैं। भारतीय लोक, पारंपरिक, जनजातीय और समकालीन कला को एक मंच पर लाने वाला यह आयोजन कला प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर के निदेशक एन.सी. गोयल ने शिविर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने सभी कलाकारों का राजस्थानी साफा पहनाकर स्वागत किया और इस पहल को भारतीय कला परंपराओं तथा आधुनिक कलात्मक अभिव्यक्तियों के बीच संवाद स्थापित करने वाला महत्वपूर्ण मंच बताया।

14 राज्यों के कलाकार दिखा रहे अपनी प्रतिभा

शिविर में 10 लोक एवं पारंपरिक कला विशेषज्ञ और 10 समकालीन कलाकार शामिल हैं। आयोजन का उद्देश्य भारतीय कला की हजारों वर्ष पुरानी परंपराओं को आधुनिक कला की नई सोच और प्रयोगधर्मिता से जोड़ना है। दर्शकों को यहां विभिन्न कला विधाओं को लाइव देखने और कलाकारों से सीधे संवाद करने का अवसर मिल रहा है।

पद्मश्री कलाकार बने आकर्षण का केंद्र

कला शिविर में पद्मश्री सम्मानित गुजरात के प्रसिद्ध पिथोरा कलाकार परेश राठवा, बिहार की मधुबनी कलाकार दुलारी देवी और राजस्थान के मुगल मिनिएचर कलाकार शाकिर अली विशेष आकर्षण हैं। इसके अलावा गोंड कला परंपरा के प्रसिद्ध कलाकार मयंक श्याम भी अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन कर रहे हैं।

समकालीन कला के दिग्गज भी शामिल

समकालीन कला वर्ग में वरिष्ठ कलाकार सुब्रत मंडल, नंदलाल ठाकुर, मुरली चीरोथ, पी.सी. किशन, चरण शर्मा, दिलीप शर्मा, प्रमोद आर्य, रामगोपाल खुमावत, केतकी राय चौधरी और जयपुर के प्रसिद्ध टेराकोटा कलाकार डॉ. चन्द्रशेखर सैन भाग ले रहे हैं। इनके कार्य भारतीय संस्कृति, परंपरा और आधुनिक दृष्टिकोण का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करते हैं।

दुर्लभ लोक कलाओं से रूबरू हो रहे दर्शक

लोक एवं पारंपरिक कला वर्ग में राजस्थान के मिनिएचर कलाकार समुद्र सिंह खंगारोत, असम के मुखौटा कला विशेषज्ञ खगेन गोस्वामी, पश्चिम बंगाल के भास्कर चित्रकार (कालीघाट चित्रकला), बिहार की नाजिदा खातून (सिक्की कला) और असम के बब्बन पाल सहित कई कलाकार अपनी विशिष्ट कला शैलियों का प्रदर्शन कर रहे हैं।

आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां कई ऐसी लोक और पारंपरिक कला विधाएं प्रदर्शित हो रही हैं, जिन्हें राजस्थान के अधिकांश दर्शकों ने पहले कभी प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा। इनमें कई कला परंपराएं ऐसी हैं जो पीढ़ियों से संरक्षित होती हुई आज भी जीवित हैं।

कला प्रेमियों और विद्यार्थियों के लिए खास अवसर

यह कला शिविर प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक आयोजित किया जा रहा है। ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों, शोधार्थियों, कला प्रेमियों और परिवारों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। यहां दर्शक कलाकारों को लाइव सृजन करते हुए देख सकते हैं और भारतीय कला विरासत को नजदीक से समझ सकते हैं।

निकहत अंसारी की संकल्पना से साकार हुआ आयोजन

इस कला शिविर की संकल्पना और क्यूरेशन राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर की क्यूरेटर निकहत अंसारी ने किया है। वहीं पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर के निदेशक डॉ. अश्विन दलवी ने इस महत्वाकांक्षी आयोजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


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LUCKY SHARMA

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