राजस्थान के टोंक में 200 बांध-तालाब बनेंगे रोजगार का जरिया, मत्स्य पालन से हर साल 10.50 करोड़ का राजस्व

Saturday, Mar 14, 2026-07:34 PM (IST)

बांध और तालाबों की जिम्मेदारी में बड़ा बदलाव

राजस्थान के टोंक जिले में बांध और तालाबों के रखरखाव को लेकर लंबे समय से मिल रही शिकायतों के बाद सरकार ने बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। पहले इन जलाशयों की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों के पास थी, लेकिन अब देखरेख का जिम्मा सिंचाई विभाग को और मत्स्य पालन से जुड़े टेंडर जारी करने की जिम्मेदारी मत्स्य विभाग को सौंप दी गई है।

इस फैसले के बाद जिले के सभी बांध और तालाबों में मत्स्य पालन से जुड़े कार्य अब मत्स्य विभाग की निगरानी में होंगे, जबकि संरचना और रखरखाव की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग निभाएगा।

पंचायतों से मिल रही थीं लगातार शिकायतें

टोंक जिले की कई ग्राम पंचायतों की ओर से लंबे समय से यह शिकायत मिल रही थी कि पंचायत राज विभाग के स्तर पर बांध और तालाबों का उचित रखरखाव नहीं हो पा रहा है। कई स्थानों पर बांधों की पाल क्षतिग्रस्त हो चुकी थी, तालाबों में गाद भर गई थी और पानी की निकासी की व्यवस्था भी ठीक नहीं थी।

इसके अलावा मत्स्य पालन के टेंडरों में भी अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही थीं। इन समस्याओं को देखते हुए सरकार ने जिम्मेदारी का पुनर्वितरण करने का निर्णय लिया है।

200 बड़े बांध-तालाब, 250 छोटे तालाब विकसित करने की योजना

टोंक जिले में फिलहाल करीब 200 बांध और बड़े तालाब मौजूद हैं, जो सिंचाई और जल संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसके अलावा जिले में करीब 250 छोटे तालाबों को भी चिन्हित किया गया है, जिन्हें भविष्य में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।

इन जलाशयों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की योजना है, जिससे जल संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।

हर साल 10.50 करोड़ का राजस्व

टोंक जिले में मत्स्य पालन पहले से ही एक महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि बन चुका है। वर्तमान में जिले के बांध और तालाबों से मत्स्य पालन के जरिए हर साल करीब 10 करोड़ 50 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन जलाशयों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया जाए तो मत्स्य उत्पादन और राजस्व दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

टेंडर प्रक्रिया भी अलग-अलग श्रेणियों में

मत्स्य पालन के लिए टेंडर की प्रक्रिया भी अलग-अलग श्रेणियों में तय की गई है।

  • ए श्रेणी: सालाना 5 लाख रुपये से अधिक राजस्व वाले बांध, जिनका टेंडर राज्य सरकार जारी करेगी।

  • बी श्रेणी: 50 हजार से 5 लाख रुपये तक राजस्व वाले बांध।

  • सी और डी श्रेणी: इससे कम राजस्व वाले बांध, जिनका टेंडर अब मत्स्य विभाग जिला स्तर पर जारी करेगा।

टोंक जिले में लगभग 60 बांध ए श्रेणी में आते हैं, जिनमें बीसलपुर और चंदलाई जैसे प्रमुख बांध शामिल हैं।

मानसून भी रहा मेहरबान

पिछले कुछ वर्षों में टोंक जिले में मानसून भी अच्छा रहा है। जिले के अधिकांश बांध और तालाब पानी से लबालब भरे हुए हैं। ऐसे में पेयजल, सिंचाई और मत्स्य पालन तीनों क्षेत्रों में लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जिम्मेदारी स्पष्ट होने से जल संरक्षण के कार्यों में तेजी आएगी और मत्स्य पालन के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इससे किसानों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ने की संभावना है।


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LUCKY SHARMA

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