टोंक के गांव में होली पर महिलाओं का ‘राज’, धुलंडी में पुरुषों का प्रवेश वर्जित
Monday, Mar 02, 2026-07:59 PM (IST)
टोंक: टोंक जिले के नगर गांव में हर वर्ष होली के दिन एक अनूठी परंपरा निभाई जाती है, जिसमें पुरुषों का गांव में प्रवेश वर्जित होता है और पूरे दिन महिलाओं का ‘राज’ चलता है। यह परंपरा लगभग 200 वर्ष पुरानी मानी जाती है और तत्कालीन जागीरदार राजा के निर्णय से शुरू हुई थी।
ग्रामीणों के अनुसार राजा ने यह नियम इसलिए बनाया था ताकि साल में एक दिन महिलाएं बिना घूंघट और सामाजिक प्रतिबंधों के होली का आनंद ले सकें। धुलंडी की सुबह पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग सभी गांव की सीमा से बाहर चले जाते हैं। महिलाएं उन्हें तिलक लगाकर गांव की सीमा तक छोड़ती हैं। पुरुष इस दौरान ढोल-नगाड़ों और झांझ-मजीरों के साथ रामधुन गाते हुए करीब दो किलोमीटर दूर पहाड़ी पर स्थित चामुंडा माता मंदिर जाते हैं, जहां मेला भरता है और माता की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
गांव में पुरुषों के बाहर जाने के बाद, महिलाएं चंग की थाप पर लोकगीत गाती हैं और रंग-गुलाल से होली खेलती हैं। मुख्य द्वारों पर महिलाएं तैनात रहती हैं और किसी भी पुरुष का प्रवेश वर्जित रहता है। यदि गलती से कोई पुरुष प्रवेश कर जाता है, तो उसे रंगों से सराबोर कर प्रतीकात्मक दंड दिया जाता है।
स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि यह परंपरा लोक आस्था से जुड़ी है। चामुंडा माता की पूजा और मंदिर में अखंड ज्योति की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता की कृपा से पशुधन, खेती-बाड़ी और विवाह संबंधी कार्यों में कोई बाधा नहीं आती।
विशेष रूप से इस परंपरा से महिलाओं को पूरी स्वतंत्रता और सम्मान मिलता है। साल में एक दिन उन्हें निर्णय लेने और समाज में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिलता है। इससे परिवार और गांव में सौहार्द और खुशहाली बनी रहती है।
धुलंडी का यह अनूठा उत्सव न केवल स्थानीय संस्कृति और आस्था की मिसाल है, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण और पारंपरिक विश्वासों के संगम को भी प्रदर्शित करता है। यहां की परंपरा ने राजस्थान के ग्रामीण Holi उत्सव में अपनी विशेष पहचान बनाई है, जो अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।
