"अरावली सोने का अंडा देने वाली मुर्गी है, खनन इसे एक दिन में मारने जैसा" : पूर्व महाधिवक्ता गिरधारी सिंह बापना
Friday, Aug 07, 2026-06:04 PM (IST)
जयपुर। राजस्थान के पूर्व महाधिवक्ता एवं पर्यावरण संरक्षण के पक्षधर गिरधारी सिंह बापना ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली पर्वतमाला के संरक्षण के लिए गठित हाई पावर कमेटी से अरावली को हर हाल में सुरक्षित रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अरावली केवल एक पर्वत श्रृंखला नहीं, बल्कि राजस्थान के पर्यावरण, जल स्रोतों, वन्यजीवों, जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत की आधारशिला है। इसे महज खनिजों का भंडार मानकर अंधाधुंध खनन करना भविष्य की पीढ़ियों के साथ अन्याय होगा।
राजस्थान दौरे पर आई हाई पावर कमेटी के अध्यक्ष और सदस्यों को भेजे गए ई-मेल पत्र में बापना ने कहा कि अरावली करोड़ों वर्षों में विकसित हुई प्राकृतिक धरोहर है, जिसे एक बार नष्ट करने के बाद दोबारा तैयार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यह हमारे पूर्वजों की अमूल्य विरासत है और इसे सुरक्षित रखना वर्तमान ही नहीं, आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य की भी गारंटी है।
बापना ने कहा कि अरावली राज्य के जलवायु संतुलन, वर्षा, भूजल संरक्षण और नदियों-नालों के अस्तित्व के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने चेतावनी दी कि अनियंत्रित खनन से प्राकृतिक जल स्रोत खत्म हो रहे हैं, जंगल सिकुड़ रहे हैं और वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है। इसके कारण वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों की ओर पलायन कर रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि बिना खनन के भी अरावली सदियों से लाखों लोगों को आजीविका, पशुओं के लिए चारा-पानी और पर्यटन के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराती रही है। यदि इसका संरक्षण किया जाए तो यह भविष्य में भी प्रदेश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों की मजबूत आधारशिला बनी रह सकती है।
बापना ने हाल ही में जयपुर में भारत सेवा संस्थान एवं अन्य सामाजिक संगठनों द्वारा आयोजित संगोष्ठी के निष्कर्षों का हवाला देते हुए कहा कि अरावली "सोने का अंडा देने वाली मुर्गी" की तरह है। यदि इसे बचाकर रखा गया तो इसके धार्मिक, प्राकृतिक और पर्यटन स्थलों से आने वाली पीढ़ियों को लगातार रोजगार और आर्थिक अवसर मिलते रहेंगे, लेकिन अल्पकालिक लाभ के लिए अंधाधुंध खनन करना उस मुर्गी को एक ही दिन में मार देने जैसा होगा।
उन्होंने हाई पावर कमेटी को पर्यावरणविदों द्वारा तैयार "Indian Mountains Preservation, Conservation and Protection Act" का मसौदा भी विचारार्थ भेजा है और पर्वतीय क्षेत्रों के संरक्षण के लिए मजबूत कानूनी व्यवस्था बनाने की मांग की है।
