सरदार पटेल की नीतियां आज भी भारत के लिए मार्गदर्शक, राष्ट्रीय एकता और अखंडता के प्रतीक हैं लौह पुरुष: वासुदेव देवनानी
Saturday, Oct 31, 2026-01:29 PM (IST)
जयपुर। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती और राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विशेष लेख के माध्यम से सरदार पटेल के व्यक्तित्व, राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान और उनकी नीतियों की वर्तमान प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल केवल स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी ही नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के राजनीतिक एकीकरण के प्रमुख शिल्पकार भी थे। उनकी दूरदृष्टि, दृढ़ नेतृत्व क्षमता, प्रशासनिक कुशलता और राष्ट्रीय एकता के प्रति प्रतिबद्धता आज भी देश के लिए मार्गदर्शक हैं।
देवनानी ने अपने लेख में कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में देशी रियासतों का एकीकरण और राष्ट्रीय अखंडता को बनाए रखना था। उस समय 562 से अधिक रियासतों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता थी। ऐसे चुनौतीपूर्ण दौर में तत्कालीन उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने वी.पी. मेनन सहित अपने सहयोगियों के साथ संवाद, कूटनीति और दृढ़ प्रशासनिक निर्णयों के माध्यम से रियासतों के भारतीय संघ में विलय का ऐतिहासिक कार्य किया।
खेड़ा और बारडोली आंदोलन से मिली 'सरदार' की पहचान
वासुदेव देवनानी ने बताया कि 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में जन्मे वल्लभभाई पटेल का जीवन संघर्ष, अनुशासन और संगठन क्षमता का प्रतीक रहा। महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़कर उन्होंने खेड़ा सत्याग्रह और बारडोली आंदोलन में किसानों को संगठित किया। बारडोली आंदोलन में उनके प्रभावशाली नेतृत्व के बाद उन्हें 'सरदार' की उपाधि मिली।
उन्होंने कहा कि जूनागढ़ और हैदराबाद जैसी जटिल परिस्थितियों में भी सरदार पटेल की भूमिका भारत की एकता और अखंडता के लिए महत्वपूर्ण रही। उनका जीवन बताता है कि राष्ट्र निर्माण के लिए केवल आदर्श और संकल्प पर्याप्त नहीं होते, बल्कि दूरदृष्टि, समय पर निर्णय लेने की क्षमता और राष्ट्रीय हितों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता भी आवश्यक है।
आरएसएस पर प्रतिबंध हटाने की प्रक्रिया में भी रही महत्वपूर्ण भूमिका
देवनानी ने अपने लेख में सरदार पटेल की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद फरवरी 1948 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर प्रतिबंध लगाया गया था। उस समय गृह मंत्री रहे सरदार पटेल ने प्रतिबंध हटाने की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण संवाद और पहल की। इसके परिणामस्वरूप 11 जुलाई 1949 को भारत सरकार ने आरएसएस पर लगाया गया प्रतिबंध औपचारिक रूप से हटा लिया।
राष्ट्रीय एकता दिवस और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का विशेष महत्व
वासुदेव देवनानी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही गुजरात के नर्मदा जिले के एकता नगर में सरदार पटेल की 182 मीटर ऊंची विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' स्थापित की गई।
उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सामूहिक संकल्प का प्रतीक है। राष्ट्रीय एकता दिवस हमें याद दिलाता है कि देश की एकता बनाए रखना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य भी है।
राजस्थान के एकीकरण में भी रही सरदार पटेल की अहम भूमिका
राजस्थान के ऐतिहासिक गठन का उल्लेख करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि 30 मार्च 1949 को जयपुर में आयोजित राजस्थान राज्य के गठन के ऐतिहासिक समारोह में सरदार वल्लभभाई पटेल स्वयं उपस्थित रहे थे।
उन्होंने कहा कि राजस्थान विधानसभा के डिजिटल म्यूजियम में स्थापित संविधान गैलरी में भारत और राजस्थान के एकीकरण की ऐतिहासिक यात्रा को प्रदर्शित किया गया है। इसमें सरदार पटेल की उपस्थिति में आयोजित राजस्थान गठन समारोह के ऐतिहासिक चित्रों को भी प्रमुखता से स्थान दिया गया है। विधानसभा संग्रहालय को आमजन के लिए खोलने के बाद अब तक 50 हजार से अधिक लोग इसका अवलोकन कर चुके हैं।
एकता का अर्थ एकरूपता नहीं, विविधता का सम्मान जरूरी
देवनानी ने अपने लेख में कहा कि भारत की सबसे बड़ी विशेषता उसकी सांस्कृतिक, भाषायी और सामाजिक विविधता है। राष्ट्रीय एकता का अर्थ सभी भिन्नताओं को समाप्त करना नहीं, बल्कि उन्हें संवैधानिक और राष्ट्रीय ढांचे में सम्मानजनक स्थान देना है।
उन्होंने कहा कि एक मजबूत राष्ट्र वह नहीं होता, जहां सभी नागरिक एक जैसा सोचते हों, बल्कि वह होता है जहां अलग-अलग विचार रखने वाले नागरिक साझा संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहते हैं। सरदार पटेल का दृष्टिकोण हमें मतभेदों का समाधान संवाद, पारस्परिक विश्वास और संवैधानिक मर्यादाओं के माध्यम से खोजने की प्रेरणा देता है।
युवाओं के लिए अनुशासन, संगठन और राष्ट्र प्रथम का संदेश
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सरदार पटेल का जीवन आज की युवा पीढ़ी के लिए अनुशासन, परिश्रम, संगठन और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व का महत्वपूर्ण पाठ है। युवाओं को अपनी ऊर्जा और प्रतिभा का उपयोग राष्ट्र निर्माण और विकास में करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरदार पटेल की विरासत को केवल समारोहों, नारों और प्रतिमाओं तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उनके विचारों और आदर्शों को अपने व्यवहार में उतारना चाहिए। सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, सामाजिक सद्भाव, संवाद और जवाबदेही को महत्व देना ही उनके प्रति सच्चा सम्मान होगा।
इतिहास से प्रेरणा लेकर वर्तमान को बेहतर बनाने की जरूरत
वासुदेव देवनानी ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल का योगदान केवल भारत के राजनीतिक एकीकरण तक सीमित नहीं है। उनकी विरासत राष्ट्रीय एकता, सुशासन, प्रशासनिक निष्पक्षता और विविधताओं के बीच सहमति बनाने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र केवल भूगोल से नहीं बनता, बल्कि विश्वास, कर्तव्य, मजबूत संस्थाओं और सामूहिक संकल्प से निर्मित होता है। सरदार पटेल को याद करने का सबसे सार्थक तरीका उनके जीवन मूल्यों को वर्तमान में अपनाना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।
राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर देवनानी ने लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के व्यक्तित्व और कृतित्व को नमन करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
