सचिन पायलट बने पंजाब कांग्रेस के प्रभारी, 2027 चुनाव से पहले बड़ी जिम्मेदारी; जानें क्या है रणनीति

Sunday, Sep 06, 2026-02:09 PM (IST)

जयपुर। कांग्रेस ने राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया प्रभारी बनाया है। आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले हुई इस नियुक्ति को पार्टी की चुनावी रणनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। पायलट को यह जिम्मेदारी भूपेश बघेल की जगह दी गई है।

पंजाब में कांग्रेस लंबे समय से संगठनात्मक चुनौतियों और अंदरूनी गुटबाजी से जूझ रही है। ऐसे में पार्टी आलाकमान को उम्मीद है कि सचिन पायलट अपने संगठनात्मक अनुभव के जरिए अलग-अलग गुटों को एक मंच पर लाने और कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

क्यों पायलट पर जताया भरोसा?

सचिन पायलट की सबसे बड़ी ताकत उनकी जमीनी राजनीति और संगठन पर पकड़ मानी जाती है। राजस्थान में 2014 में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार जमीनी स्तर पर काम किया। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सत्ता में वापसी में उनके संगठनात्मक अभियान को महत्वपूर्ण माना गया।

इसके बाद पायलट को अलग-अलग राज्यों में संगठन की जिम्मेदारियां भी दी गईं। छत्तीसगढ़ में भी उन्हें पार्टी संगठन को मजबूत करने का जिम्मा मिला था। अब कांग्रेस ने उन्हें पंजाब जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में भेजकर बड़ा भरोसा जताया है।

पंजाब में क्या होगी सबसे बड़ी चुनौती?

पायलट के सामने सबसे पहली चुनौती पंजाब कांग्रेस के भीतर मौजूद गुटबाजी को कम करना होगी। पार्टी के अलग-अलग वरिष्ठ नेताओं के बीच लंबे समय से राजनीतिक खींचतान की खबरें सामने आती रही हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह बाजवा जैसे नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाना पायलट के लिए अहम होगा। चुनाव से पहले पार्टी को एकजुट करना उनके मिशन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

इसके अलावा आम आदमी पार्टी की सरकार के खिलाफ कांग्रेस को मजबूत विपक्ष के तौर पर खड़ा करना और बीजेपी समेत अन्य दलों के बीच अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करना भी बड़ी चुनौती होगी।

पंजाब में ‘राजस्थान कनेक्शन’

सचिन पायलट की नियुक्ति के साथ पंजाब की राजनीति में एक दिलचस्प ‘राजस्थान कनेक्शन’ भी बन गया है। बीजेपी पहले ही राजस्थान के वरिष्ठ नेता सतीश पूनिया को पंजाब की जिम्मेदारी दे चुकी है।

ऐसे में 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस की रणनीति तैयार करने वाले दोनों प्रमुख चेहरे राजस्थान से हैं। एक तरफ सतीश पूनिया बीजेपी के संगठन को मजबूत करने की कोशिश करेंगे, तो दूसरी तरफ सचिन पायलट कांग्रेस के संगठन को एकजुट करने और सत्ता में वापसी की जमीन तैयार करेंगे।

युवाओं पर भी रहेगा फोकस

पायलट की युवाओं के बीच लोकप्रियता को देखते हुए कांग्रेस उनकी नई जिम्मेदारी में युवा कार्यकर्ताओं को जोड़ने पर भी जोर दे सकती है। पार्टी के सामने सिर्फ नेताओं के बीच समन्वय बनाने की चुनौती नहीं है, बल्कि बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना भी जरूरी होगा।

अब सचिन पायलट के सामने बड़ा सवाल यही है कि क्या वह पंजाब कांग्रेस के भीतर की खींचतान को खत्म कर पार्टी को एकजुट कर पाएंगे और 2027 में आम आदमी पार्टी को चुनौती देने के लिए कांग्रेस को मजबूत स्थिति में ला पाएंगे। पंजाब की सियासत में राजस्थान के दो बड़े नेताओं की यह नई भूमिका आने वाले चुनाव में काफी अहम मानी जा रही है।


Content Editor

Anil Jangid

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