राजस्थान पुलिस में ''दलित'' शब्द के प्रयोग पर रोक, अब सभी सरकारी रिकॉर्ड में केवल ''अनुसूचित जाति'' लिखा जाएगा
Friday, Jul 10, 2026-02:56 PM (IST)
जयपुर। राजस्थान पुलिस विभाग ने अपने प्रशासनिक और आधिकारिक कामकाज में महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव करते हुए सरकारी दस्तावेजों, एफआईआर, जांच रिपोर्टों, पत्राचार और दैनिक रिकॉर्ड में 'दलित' शब्द के उपयोग पर रोक लगा दी है। नए निर्देशों के अनुसार अब पुलिस विभाग से संबंधित सभी आधिकारिक अभिलेखों में केवल संवैधानिक शब्द 'अनुसूचित जाति' का ही प्रयोग किया जाएगा।
यह आदेश कार्यालय अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (विविध प्रकोष्ठ एवं एससी), राजस्थान, जयपुर की ओर से जारी किया गया है। बताया गया है कि यह निर्णय गृह विभाग के उप शासन सचिव (पुलिस) के पत्र तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है। यह आदेश पुलिस अधीक्षक ज्ञानचन्द्र यादव द्वारा जारी सर्कुलर के माध्यम से प्रदेश के सभी पुलिस अधीक्षकों, आयुक्तालयों और थानों तक पहुंचाया गया है।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अब किसी भी सरकारी पत्राचार, एफआईआर, केस डायरी, जांच रिपोर्ट, कार्यालयी अभिलेख या अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में 'दलित' शब्द का प्रयोग नहीं किया जाएगा। इसके स्थान पर केवल 'अनुसूचित जाति' शब्द का उपयोग किया जाएगा, जो संविधान और कानून में मान्यता प्राप्त आधिकारिक शब्दावली है।
पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी निर्देश में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के 15 मार्च 2015 के पत्र तथा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा राजस्थान शासन सचिवालय के गृह विभाग द्वारा जारी पत्र के संदर्भ में राज्य स्तर पर इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता जताई गई थी। इसी क्रम में यह नया आदेश लागू किया गया है।
इस फैसले का प्रभाव प्रदेश के सभी पुलिस थानों और पुलिस इकाइयों के प्रशासनिक कार्यों पर पड़ेगा। अब अनुसूचित जाति से संबंधित मामलों में दर्ज होने वाले मुकदमों, केस डायरियों, जांच प्रतिवेदनों और अन्य आधिकारिक रिकॉर्ड में केवल संवैधानिक शब्दावली का ही उपयोग किया जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे सरकारी दस्तावेजों में एकरूपता आएगी और कानूनी रूप से स्वीकृत शब्दों का प्रयोग सुनिश्चित होगा।
हालांकि, यह आदेश मुख्य रूप से पुलिस विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर लागू है। आम नागरिकों, मीडिया या सामाजिक विमर्श में किसी शब्द के उपयोग को लेकर इस आदेश में कोई अलग निर्देश नहीं दिए गए हैं। राजस्थान पुलिस ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे नए आदेश का पूर्ण पालन सुनिश्चित करें और भविष्य में सभी आधिकारिक दस्तावेजों में निर्धारित संवैधानिक शब्द 'अनुसूचित जाति' का ही प्रयोग करें।
