भीलवाड़ा में अनोखा वाकया: विधायक गोपीचंद मीणा ने बुजुर्ग के हाथ पर लिखा “एक साल में बनेगा पुल”
Wednesday, Feb 11, 2026-06:51 PM (IST)
भीलवाड़ा जिले के जहाजपुर-कोटडी क्षेत्र में एक कार्यक्रम के दौरान उस समय दिलचस्प और असमंजस भरा दृश्य देखने को मिला, जब विधायक गोपीचंद मीणा की घोषणा के बीच ग्रामीणों ने जोर देकर कहा—“हमें घोषणा नहीं, आश्वासन चाहिए।”
ग्रामीण लंबे समय से कांटी-घेवरिया नाले पर टूटी पुलिया की समस्या से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों से सिर्फ घोषणाएं होती रही हैं, लेकिन धरातल पर काम नहीं हुआ। इसी मुद्दे को लेकर कार्यक्रम में मौजूद ग्रामीणों ने विधायक से पुलिया निर्माण की स्पष्ट समयसीमा मांगी।
बुजुर्ग की जिद और विधायक का अनोखा आश्वासन
कार्यक्रम के दौरान एक बुजुर्ग, रामेश्वर लाल सेन, मंच पर चढ़ गए और विधायक से कहा कि पहले भी कई नेता आश्वासन दे चुके हैं, लेकिन काम नहीं हुआ। उन्होंने लिखित में आश्वासन देने की मांग की। मौके पर जब कोई कागज उपलब्ध नहीं था, तो विधायक गोपीचंद मीणा ने मुस्कुराते हुए बुजुर्ग के हाथ पर ही पेन से लिख दिया- “एक साल में पुल का निर्माण कार्य पूरा करवाएंगे।”
यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए हैरान करने वाला था और देखते ही देखते चर्चा का विषय बन गया।
‘घोषणाओं की नहीं, काम की जरूरत’
ग्रामीणों का कहना है कि कांटी-घेवरिया नाले की पुलिया लंबे समय से टूटी हुई है, जिससे आवागमन में भारी परेशानी होती है। बारिश के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है।
लोगों का साफ कहना है कि अब उन्हें मंच से की जाने वाली घोषणाओं से ज्यादा जमीनी काम चाहिए।
कांग्रेस पर साधा निशाना
कार्यक्रम के दौरान विधायक गोपीचंद मीणा ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में कांग्रेस सरकार “सेटिंग” में व्यस्त रही और जनहित के कार्य ठप पड़े रहे। इशारों-इशारों में उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव धीरज गुर्जर पर भी निशाना साधा। विधायक ने आरोप लगाया कि किसानों को पर्याप्त बिजली नहीं मिली और शिकायतों पर “लोड सेटिंग” का जवाब दिया जाता रहा।
उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय स्तर पर जनसमस्याओं के समाधान की बजाय राजनीतिक सेटिंग का खेल चलता रहा, जिसकी वजह से कांटी-घेवरिया पुलिया आज तक अधूरी पड़ी है।
अब नजरें वादे पर
विधायक द्वारा बुजुर्ग के हाथ पर लिखित आश्वासन देने का मामला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय है। ग्रामीणों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या एक साल के भीतर पुलिया निर्माण का वादा पूरा होगा या यह भी सिर्फ एक प्रतीकात्मक कदम बनकर रह जाएगा।
