Jaisalmer में भारत-पाक सीमा पर Dargah दरगाह विवाद गरमाया, प्रशासन अब 7 दिन बाद करेगा बड़ी कार्रवाई

Wednesday, Jun 24, 2026-01:51 PM (IST)

जैसलमेर। सीमा सुरक्षा को मजबूत बनाने और अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में सरकारी भूमि, अवैध निर्माण तथा संदिग्ध गतिविधियों की जांच के उद्देश्य से राजस्थान सरकार और जिला प्रशासन द्वारा "ऑपरेशन बॉर्डर क्लीन" चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत रामगढ़-तनोट बाईपास मार्ग पर स्थित मेहमूद शाह पीर जिलानी दरगाह को नोटिस जारी किया गया था।नोटिस की समय सीमा समाप्त होने के बाद मंगलवार को रामगढ़-द्वितीय उपनिवेशन तहसील कार्यालय में सुनवाई आयोजित की गई। सुनवाई की अध्यक्षता उपनिवेशन तहसीलदार ज्ञान सिंह भाटी ने की। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर प्रशासन के समक्ष अपने तर्क रखे।

 

सुनवाई के दौरान सबसे बड़ा सवाल दरगाह की भूमि की वैधता और उसके राजस्व रिकॉर्ड को लेकर उठा। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार का निर्णय भावनाओं या दबाव के आधार पर नहीं, बल्कि उपलब्ध राजस्व अभिलेखों और कानूनी दस्तावेजों के आधार पर ही लिया जाएगा।तहसीलदार ज्ञान सिंह भाटी ने संबंधित हल्का पटवारी को मौके का निरीक्षण करने और विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राजस्व रिकॉर्ड की जांच कर यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि संबंधित भूमि का राजस्व अभिलेखों में क्या दर्ज है और उसकी वास्तविक स्थिति क्या है।प्रशासन ने सात दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि यही रिपोर्ट आगे की कार्रवाई और प्रशासनिक निर्णय का आधार बनेगी।

 

दूसरी ओर मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने सुनवाई के दौरान दावा किया कि मेहमूद शाह पीर जिलानी दरगाह वैध कब्रिस्तान भूमि के भीतर स्थित है और यह वर्षों पुराना धार्मिक स्थल है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। समुदाय की ओर से यह भी सवाल उठाया गया कि किसी धार्मिक ढांचे पर कार्रवाई करने का अधिकार किस स्तर के अधिकारी के पास होता है। प्रतिनिधियों का कहना था कि ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय जिला कलेक्टर स्तर पर लिया जाना चाहिए। समुदाय ने प्रशासन से मांग की कि किसी भी प्रकार की कार्रवाई से पहले सभी दस्तावेजों और ऐतिहासिक रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच की जाए तथा धार्मिक भावनाओं का भी सम्मान रखा जाए।

 

दरअसल, ऑपरेशन बॉर्डर क्लीन के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में चल रही कार्रवाई ने पूरे इलाके में राजनीतिक और सामाजिक हलचल पैदा कर दी है। सीमा सुरक्षा, सरकारी भूमि और धार्मिक स्थलों से जुड़े मुद्दों को लेकर विभिन्न संगठनों और समुदायों की नजरें अब इस मामले पर टिकी हुई हैं।

 

प्रशासन फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रहा है और राजस्व रिकॉर्ड की जांच पूरी होने का इंतजार कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि कानून और दस्तावेजों के आधार पर ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।अब सबकी निगाहें उस रिपोर्ट पर टिकी हैं जिसे सात दिन के भीतर प्रस्तुत किया जाना है। माना जा रहा है कि पटवारी की तथ्यात्मक रिपोर्ट ही यह तय करेगी कि दरगाह की भूमि की वास्तविक स्थिति क्या है और प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।


Content Editor

Anil Jangid

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