25 करोड़ खर्च के बावजूद मेजा फीडर से बहता पानी, सीपेज ने प्रभावित किए हजारों बीघा खेत

Monday, Mar 02, 2026-03:50 PM (IST)

राजसमंद: राजसमंद के रेलमगरा क्षेत्र में स्थित मातृकुण्डिया बांध से जुड़ी समस्याएं अब केवल तकनीकी मुद्दा नहीं रह गई हैं, बल्कि यह किसानों के धैर्य और प्रशासनिक संवेदनहीनता की परीक्षा बन गई हैं। बांध से प्रभावित गांवों के किसान पिछले साढ़े चार माह से गेटों पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकारी मशीनरी अब तक उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं कर सकी है।

 

सरकार ने सीपेज रोकने के लिए 18 करोड़ रुपए की नई राशि स्वीकृत की है, लेकिन आंदोलनरत किसानों का कहना है कि यह केवल “सांत्वना” भर है। किसानों का आरोप है कि वर्ष 2021 और 2023 में बांध की मरम्मत और सुधार के लिए क्रमिक बजट और कार्य योजना के बावजूद, मेजा फीडर की मरम्मत गुणवत्ता पूर्ण नहीं हुई, जिससे सीपेज बढ़ा और समस्या और गंभीर हो गई।

 

सीपेज के कारण जवा सिया, सांवलपुरा, गुरजनिया और आसपास के गांवों में हजारों बीघा खेत जलमग्न हो गए। खड़ी फसलें सड़ गईं और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इसके अलावा, गेट टूटे हुए हैं और सिंचाई विभाग ने फीडर के मुहाने पर मिट्टी के कट्टे डालकर पानी रोकने का प्रयास किया, लेकिन पानी लगातार बह रहा है।

 

बांध का जलस्तर गेट खोलकर कम किया गया है और मौजूदा पानी हिन्दुस्तान जिंक तथा रेलमगरा और गंगापुर तहसीलों के लिए रिजर्व बताया जा रहा है। बावजूद इसके प्रभावित गांवों में पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है, जिससे स्थानीय किसानों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा।

 

किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। बांध भरने पर गिलूण्ड, खुमाखेड़ा, कुण्डिया, कोलपुरा और टीलाखेड़ा गांवों के खेत डूब जाते हैं, जबकि सीपेज से जवासियां, सांवलपुरा और गुरजनिया के खेत जलभराव का शिकार हो रहे हैं। कई खेतों में अब खेती करना मुश्किल हो गया है।

 

आंदोलनरत किसान उच्च स्तरीय वैज्ञानिक सर्वे करवाने और स्थायी समाधान करने की मांग कर रहे हैं, ताकि हर साल दोहराई जाने वाली समस्या से राहत मिल सके और कृषि योग्य भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित हो। उन्होंने सरकार और सिंचाई विभाग से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की अपील की है।


Content Editor

Anil Jangid

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