राजसमंद मार्बल उद्योग पर युद्ध का असर: 80% प्लांट बंद, 50 हजार मजदूरों पर संकट गहराया

Saturday, Apr 11, 2026-04:44 PM (IST)

राजसमंद। वैश्विक तनाव और युद्ध जैसे हालातों का असर अब राजस्थान के राजसमंद जिले की प्रमुख अर्थव्यवस्था मानी जाने वाली मार्बल इंडस्ट्री पर गंभीर रूप से दिखाई देने लगा है। जिले की लाइफलाइन कही जाने वाली यह इंडस्ट्री इस समय अपने सबसे बड़े संकट का सामना कर रही है, जहां माइंस, मार्बल प्रोसेसिंग यूनिट्स और पाउडर प्लांट लगातार बंद हो रहे हैं।

 

जानकारी के अनुसार, राजसमंद की मार्बल इंडस्ट्री का सीधा संबंध गुजरात के मोरबी स्थित टाइल्स और सिरेमिक उद्योग से है। यहां की माइंस से निकलने वाले मार्बल वेस्ट को प्रोसेस कर पाउडर के रूप में मोरबी भेजा जाता था, लेकिन वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और युद्ध के कारण मोरबी के करीब 1000 गैस आधारित प्लांट बंद हो चुके हैं। इसका सीधा असर राजसमंद की पूरी सप्लाई चेन पर पड़ा है।

 

स्थिति यह है कि जिले के लगभग 80 प्रतिशत मार्बल पाउडर प्लांटों में काम पूरी तरह ठप हो गया है। जहां पहले फैक्ट्रियों और माइंस में 25 से 30 मजदूर काम करते थे, वहां अब सिर्फ 1 या 2 गार्ड ही नजर आ रहे हैं। उत्पादन रुकने से छोटे और बड़े दोनों स्तर के उद्योगों पर गहरा आर्थिक संकट छा गया है।

 

इस संकट का सबसे बड़ा असर श्रमिक वर्ग पर पड़ा है। अनुमान के मुताबिक लगभग 50 हजार मजदूर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं। काम बंद होने के कारण बड़ी संख्या में मजदूर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। वहीं छोटे व्यापारियों के सामने बिजली बिल, मशीनों के मेंटेनेंस और अन्य खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है।

 

स्थानीय बाजारों में भी इस मंदी का असर साफ दिखाई दे रहा है। व्यापारिक गतिविधियां लगभग ठप हो चुकी हैं, जिससे पूरे जिले की आर्थिक रफ्तार धीमी पड़ गई है। जो राजसमंद कभी मार्बल उद्योग के लिए देश-विदेश में जाना जाता था, वहां अब आर्थिक अनिश्चितता का माहौल है।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द ही सप्लाई चेन बहाल नहीं होती और मोरबी के प्लांट दोबारा शुरू नहीं किए जाते, तो राजसमंद की यह विश्व प्रसिद्ध मार्बल इंडस्ट्री लंबे समय तक के लिए गंभीर नुकसान में जा सकती है। इससे न केवल उद्योग बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका पर भी स्थायी संकट खड़ा हो सकता है।


Content Editor

Anil Jangid

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