राजस्थान में यहां दबा पड़ा है 122 मिलियन टन Gold, क्यों चाहकर भी नहीं निकाल पा रही सरकार?
Tuesday, Apr 28, 2026-07:44 PM (IST)
जयपुर। राजस्थान एक ऐसा प्रदेश है जहां कई तरह के खनिज भंडार हैं जिनमें सोना भी शामिल है। बताया जा रहा है कि यहां पर 122 मिलियन टन सोने का खजाना दबा पड़ा है लेकिन उस पर ऐसा ताला लगा पड़ा है कि उसें निकाल ही नहीं पा रहे। दरअसल, यह सोना किसी कमरे या खजाने में नहीं बल्कि जमीन के नीचे दबा पड़ा है जिसके खनन की योजनाएं तो बनती हैं लेकिन लगातार अड़चनों में फंसकर रह जाती है। राज्य में दो गोल्ड खदानों डगोचा और कांकरिया गारा ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया शुरू हुई थी जिसें फिलहाल रोक दिया गया है। इसके पीछे का कारण इन दोनों दोनों ही खदानों का अरावली क्षेत्र में आना है।
जबकि बांसवाड़ा जिले के भूकिया-जगपुरा क्षेत्र की खान पहले ही तकनीकी कारणों से निरस्त होकर अब न्यायिक प्रक्रिया में उलझ गई है। राजस्थान देश के कुल स्वर्ण भंडार का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा रखता है। इन भंडारों की खोज कई वर्ष पहले हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद अब तक खनन कार्य शुरू नहीं हो सका है।
देश में राजस्थान सहित छह राज्यों में करीब 501 मिलियन टन स्वर्ण भंडार चिन्हित किए जा चुके हैं, जिनमें से लगभग 122 मिलियन टन भंडार अकेले राजस्थान में है। भंडार के लिहाज से राजस्थान देश में बिहार के बाद दूसरे स्थान पर है। प्रदेश के बांसवाड़ा, सलूंबर और दौसा जिलों में प्रमुख रूप से स्वर्ण अयस्क मौजूद है, लेकिन खनन प्रदेश में कब तक शुरू होगा, इसका जवाब फिलहाल खान विभाग के अधिकारियों के पास भी नहीं है।
बांसवाड़ा जिले के भूकिया-जगपुरा क्षेत्र में करीब तीन वर्ष पहले खान का आवंटन किया गया था और कंपनी ने नीलामी के बाद राशि भी जमा कराई थी। बाद में तकनीकी कारणों से यह आवंटन निरस्त कर दिया गया। फिलहाल मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। यहां वर्ष 1992 के आसपास 3.50 किमी लंबे और 2 किमी चौड़े क्षेत्र में लगभग 114.78 मिलियन टन स्वर्ण अयस्क का अनुमान लगाया गया था।
सलूंबर जिले के डगोचा ब्लॉक में नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन यह क्षेत्र अरावली पर्वत श्रृंखला में आने के कारण फिलहाल रोक दी गई है। यहां वर्ष 2000 से 2002 के बीच करीब 1.74 मिलियन टन स्वर्ण अयस्क का अनुमान लगाया गया था।
बांसवाड़ा जिले के कांकरिया गारा ब्लॉक में हाल ही नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन अरावली क्षेत्र में होने के कारण इसे भी रोक दिया गया है।
दौसा जिले के ढाणी-बसेड़ी ब्लॉक में वर्ष 2000 से 2003 के दौरान किए गए पूर्वेक्षण में करीब 3.80 मिलियन टन स्वर्ण अयस्क का अनुमान सामने आया था। यहां सामरिक महत्व के क्रिटिकल मिनरल्स के भंडार होने की भी संभावना जताई जा रही है, लेकिन अभी तक नीलामी प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।
