झालावाड़ में महात्मा ज्योतिराव फुले की 199वीं जयंती: रैली, शोभायात्रा और सम्मान समारोह का आयोजन!
Sunday, Apr 12, 2026-12:14 PM (IST)
राजस्थान के झालावाड़ जिले में समाज सुधारक महात्मा ज्योतिराव फुले की 199वीं जयंती हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई गई। जिले के खानपुर कस्बे सहित विभिन्न स्थानों पर रैली, शोभायात्रा और सम्मान समारोह आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत अटरू रोड स्थित ब्रह्माणी माता मंदिर परिसर से हुई, जहां महात्मा फुले के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन किया गया। इसके बाद एक भव्य वाहन रैली निकाली गई, जिसमें सैकड़ों मोटरसाइकिलों का काफिला शामिल रहा। महात्मा फुले का चित्र एक सजी-धजी बग्गी में सजाकर पूरे कस्बे में घुमाया गया।
रैली के दौरान जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया और श्रद्धांजलि अर्पित की। दहीखेड़ा चौराहे पर क्षेत्रीय विधायक सुरेश गुर्जर ने भी पुष्पवर्षा कर कार्यक्रम में सहभागिता निभाई।
समाज सुधार के संदेश पर जोर
कार्यक्रम में आयोजित सभा में वक्ताओं ने महात्मा फुले के जीवन और उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 11 अप्रैल 1827 को पुणे में जन्मे फुले ने महिला शिक्षा, दलित उत्थान और सामाजिक समानता के लिए ऐतिहासिक कार्य किए।
उन्होंने 1848 में बालिकाओं के लिए पहला स्कूल खोला, जिसमें उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले की महत्वपूर्ण भूमिका रही। साथ ही 1873 में सत्यशोधक समाज की स्थापना कर उन्होंने जाति प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई।
प्रतिभावान छात्रों का सम्मान
झालावाड़ में नर्बदेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आयोजित समारोह में फूलमाली समाज द्वारा प्रतिभावान छात्रों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर 70% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्रों को पुरस्कार देकर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
समारोह में मुख्य अतिथि चन्द्रशेखर सुमन सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत माल्यार्पण कर किया गया और समाज के वरिष्ठजनों का भी सम्मान किया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और शोभायात्रा
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिसने माहौल को उत्सवमय बना दिया। इसके बाद शहर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें घोड़े, झांकियां और पारंपरिक वेशभूषा में लोग शामिल हुए।
शोभायात्रा में महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर भाग लिया, जो आकर्षण का केंद्र रहा। यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए पुनः मंदिर परिसर में पहुंची। जगह-जगह लोगों ने फूल बरसाकर शोभायात्रा का स्वागत किया।
सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
पूरे कार्यक्रम के दौरान पुलिस प्रशासन मुस्तैद रहा। खानपुर क्षेत्र में पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
निष्कर्ष
महात्मा ज्योतिराव फुले की जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल उनके विचारों को याद करने का अवसर था, बल्कि समाज में शिक्षा, समानता और एकता का संदेश फैलाने का भी माध्यम बना।
इस आयोजन ने यह भी दिखाया कि आज भी फुले के विचार समाज के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे।
