Mission Madhuhari: राजस्थान का अभिनव मॉडल, टाइप-1 डायबिटीज से जूझ रहे बच्चों के लिए 120 स्पेशल क्लीनिक और AI आधारित इलाज
Friday, Jul 31, 2026-06:20 PM (IST)
जयपुर |राजस्थान सरकार ने टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों और युवाओं के लिए शुरू किए गए 'मिशन मधुहारी' के जरिए सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में एक नई मिसाल कायम की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में शुरू किया गया यह नवाचार अब देश के लिए एक मॉडल बनकर उभर रहा है। मिशन का उद्देश्य वर्ष 2030 तक टाइप-1 डायबिटीज के कारण किसी भी बच्चे की मृत्यु को शून्य करना है।
राज्य में अनुमानित 53 हजार लोग टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने उपचार, डिजिटल निगरानी, जागरूकता और आधुनिक तकनीक को एकीकृत करते हुए मिशन मधुहारी की शुरुआत की।
41 जिलों में 120 विशेष क्लीनिक, 2,817 मरीजों का डिजिटल पंजीकरण
मिशन के तहत वर्तमान में 41 जिलों में 120 विशेष टाइप-1 डायबिटीज क्लीनिक संचालित किए जा रहे हैं। अगले तीन महीनों में 80 नए क्लीनिक भी शुरू किए जाएंगे। अब तक 2,817 मरीजों का पंजीकरण किया जा चुका है, जिन्हें Mission Madhuhari App के माध्यम से डिजिटल रूप से ट्रैक किया जा रहा है।
इनमें 99 प्रतिशत मरीज बेसल-बोलस इंसुलिन थेरेपी का पालन कर रहे हैं। साथ ही नियमित HbA1c जांच, फॉलोअप और आधुनिक उपचार व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है।
सर्वे से समाधान तक, पायलट प्रोजेक्ट से पूरे प्रदेश में विस्तार
मिशन की शुरुआत मार्च 2024 में स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक मूल्यांकन से हुई। जून 2024 में William J. Clinton Foundation के सहयोग से जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और नागौर में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया। सफल परिणाम मिलने के बाद इसे पूरे राजस्थान में चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया।
प्रारंभिक अध्ययन में इंसुलिन की उपलब्धता, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की कमी और उपचार प्रणाली में असमानता जैसी चुनौतियों की पहचान कर उन्हें व्यवस्थित रूप से दूर किया गया।
मरीजों को मुफ्त इंसुलिन और आधुनिक उपकरण
मिशन के तहत मरीजों को इंसुलिन, ग्लूकोमीटर, टेस्ट स्ट्रिप्स, लैंसेट और लॉगबुक निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अलावा इस वर्ष लगभग 4,000 मरीजों को Continuous Glucose Monitoring (CGM) की सुविधा भी दी जाएगी।
अब तक 500 से अधिक डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है। आशा कार्यकर्ताओं और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के माध्यम से गांव-गांव तक जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।
AI आधारित तकनीक से इलाज में नई क्रांति
मिशन मधुहारी की सबसे बड़ी खासियत इसका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मॉडल है। राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है जिसने MadhuRoop AI Digital Twin तकनीक विकसित की है। यह तकनीक मरीज के स्वास्थ्य आंकड़ों का विश्लेषण कर भविष्य में हाइपो और हाइपर ग्लाइसीमिया के जोखिम का पूर्वानुमान लगाने में मदद करती है।
इसके साथ ही Madhu Netra AI के माध्यम से डायबिटिक रेटिनोपैथी की AI आधारित स्क्रीनिंग भी शुरू की गई है। यह प्रणाली 90 प्रतिशत से अधिक सटीकता के साथ आंखों की जटिलताओं की शुरुआती पहचान करने में सक्षम है। फिलहाल इसे सात जिलों में लागू किया जा चुका है। इस नवाचार को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार-2026 से भी सम्मानित किया गया है।
इलाज के साथ जीवन प्रबंधन पर भी विशेष फोकस
मिशन मधुहारी केवल दवाइयों तक सीमित नहीं है बल्कि मरीजों के संपूर्ण जीवन प्रबंधन पर भी कार्य कर रहा है।
Madhuhari Bank के माध्यम से इंसुलिन और जरूरी मेडिकल सामग्री की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। वहीं Madhuhari Campus Initiative के तहत 205 सरकारी स्कूलों और 41 कॉलेजों को टाइप-1 डायबिटीज अनुकूल बनाया जा रहा है ताकि विद्यार्थी बिना किसी परेशानी के पढ़ाई जारी रख सकें।
इसके अलावा Madhurang कार्यक्रम के जरिए मरीजों के बीच सामुदायिक सहयोग बढ़ाया जा रहा है, जबकि MadhuVani के माध्यम से 104 हेल्पलाइन पर 24×7 परामर्श सुविधा विकसित की जा रही है।
देश का पहला MadhuSmile Wellbeing Index
राजस्थान ने टाइप-1 डायबिटीज मरीजों के लिए देश का पहला MadhuSmile Wellbeing Index भी विकसित किया है। यह मरीजों के मानसिक, सामाजिक, शैक्षणिक और आत्म-प्रबंधन से जुड़े पहलुओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन करता है।
प्रारंभिक अध्ययन में प्रतिभागियों का औसत 78.9 प्रतिशत वेलबीइंग स्कोर दर्ज किया गया। अधिकांश मरीजों ने 'Good' या 'High' श्रेणी में स्थान प्राप्त किया, जिसके आधार पर बच्चों और किशोरों के मानसिक एवं सामाजिक सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
राष्ट्रीय स्तर पर बनी मिसाल
मिशन मधुहारी के सकारात्मक अनुभवों को देखते हुए केंद्र सरकार ने भी स्कूलों में टाइप-1 डायबिटीज की सक्रिय स्क्रीनिंग को अपने दिशा-निर्देशों में शामिल किया है। राज्य सरकार अब इस मिशन का विस्तार निजी अस्पतालों तक भी कर रही है ताकि प्रत्येक मरीज का डिजिटल पंजीकरण और समग्र उपचार सुनिश्चित किया जा सके।
