फरवरी में 4 ग्रह करेंगे राशि परिवर्तन
Friday, Jan 30, 2026-01:26 PM (IST)
जयपुर। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार फरवरी माह ग्रह और नक्षत्रों के हिसाब से काफी खास होने वाला है। क्योंकि इस माह सूर्य, बुध मंगल और शुक्र ग्रह राशि परिवर्तन करने वाले हैं। फरवरी माह में 4 ग्रहों का राशि परिवर्तन हो रहा है। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि इस माह महाशिवरात्रि सहित कई बड़े व्रत-त्योहार पड़ रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर ग्रहों की स्थितियों में काफी बड़ा बदलाव होने वाला है। फरवरी माह में कुंभ राशि में सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र से लेकर राहु विराजमान रहेंगे। ऐसे में इस राशि के जातकों के लिए फरवरी माह काफी खास जाने वाला है। ऐसे में फरवरी माह में लक्ष्मी नारायण राजयोग से लेकर मंगल आदित्य, शुक्रादित्य, पंचग्रही से लेकर बुधादित्य राजयोग का निर्माण होगा। जिसके कारण कुछ राशि के जातकों को किस्मत का पूरा साथ मिल सकता है। 2026 का पहला विवाह मुहूर्त 5 फरवरी को रहेगा। साल का आखिरी मुहूर्त 6 दिसंबर को होगा। सालभर में कुल 59 विवाह मुहूर्त रहेंगे। फरवरी में 12, मार्च में 8, अप्रैल में 8 और मई में भी 8 शुभ मुहूर्त रहेंगे।
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि यह महीना बेहद विशेष होगा। इस माह में 4 बड़े ग्रह- सूर्य, बुध मंगल और शुक्र राशि परिवर्तन करने जा रहें हैं। ग्रहों के राशि परिवर्तन और उनकी चाल में बदलाव का विशेष महत्व होता है। इन ग्रहों की स्थिति में बदलाव से जहां कुछ राशि के जातकों को लाभ मिलेगा तो वहीं कुछ राशि वालों के लिए परेशानियां आ सकती हैं।
फरवरी में ग्रहों का गोचर
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि फरवरी माह में 3 फरवरी को बुध कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे, जिससे राहु के साथ युति होगी। इसके साथ ही 6 फरवरी को शुक्र भी कुंभ राशि में आ जाएंगे। ऐसे में त्रिग्रही से लेकर लक्ष्मी नारायण योग का निर्माण होगा। 6 फरवरी को सूर्य धनिष्ठा नक्षत्र, 7 फरवरी को बुध और 11 फरवरी को शुक्र शतभिषा नक्षत्र में प्रवेश कर जाएंगे। इसके बाद 13 फरवरी को सूर्य भी कुंभ राशि में आएंगे और बुधादित्य, शुक्रादित्य के साथ चतुर्ग्रही योग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही 15 फरवरी को मंगल धनिष्ठा नक्षत्र और बुध पूर्वाभाद्रपद, 19 फरवरी को अरुण कृत्तिका नक्षत्र और सूर्य शतभिषा नक्षत्र, 22 फरवरी को शुक्र पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र शनि उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के दूसरे पद में प्रवेश कर जाएंगे। इसके साथ रही 23 फरवरी को मंगल भी कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे। फरवरी के अंत में बुध कुंभ राशि में ही वक्री हो जाएंगे। इसके अलावा सिंह राशि में केतु, मीन राशि में शनि रहेंगे।
फरवरी 2026 में सबसे ज्यादा विवाह मुहूर्त
कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि 2026 का पहला विवाह मुहूर्त 5 फरवरी को रहेगा। साल का आखिरी मुहूर्त 6 दिसंबर को होगा। सालभर में कुल 59 विवाह मुहूर्त रहेंगे। फरवरी में 12, मार्च में 8, अप्रैल में 8 और मई में भी 8 शुभ मुहूर्त रहेंगे।
फरवरी - 5, 6, 8, 10, 12, 14, 19, 20, 21, 24, 25 और 26
प्राकृतिक आपदा और दुर्घटनाओं की आशंका
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि बड़े बदलाव और विवाद होने की आशंका है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि के साथ शेयर बाजार फिर से बढ़ने की भी संभावना रहेगी। इससे अर्थव्यवस्था मजबूत होने के योग बनेंगे। राजनीतिक उथल-पुथल एवं प्राकृतिक आपदाओं की आशंका बढ़ेगी। लोगों को विशेष लाभ मिलेगा। शिक्षा प्रणाली में सुधार के भी योग बनेंगे। धरना जुलूस प्रदर्शन आंदोलन गिरफ्तारियां होगी। रेल दुर्घटना होने की संभावना। महिलाओं के लिए समय शुभ नहीं है। कोई बड़ी फिल्म अभिनेत्री से दुखद समाचार। देश और दुनिया में राजनीतिक बदलाव होंगे। सत्ता संगठन में परिवर्तन होगा। आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलेगा। मनोरंजन फिल्म नाटक फैशन डांसर कॉमेडी चर्चा में रहेंगे। अचानक मौसमी बदलाव भी हो सकते हैं। बारिश और बर्फबारी होने की आशंका है। सेना की ताकत बढ़ेगी। देश की कानून व्यवस्था भी मजबूत होगी। मनोरंजन फिल्म खेलकूद एवं गायन क्षेत्र से बुरी खबर मिलेगी। बड़े नेताओं का दुखद समाचार मिलने की संभावना।
राशियों को होगा फायदा
कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि वृषभ, मिथुन, सिंह, तुला, मकर और कुंभ राशि के लोगों को सबसे ज्यादा शुभ फल की प्राप्ति होगी। कार्यों में अच्छी सफलताएं प्राप्त होंगी। व्यापार में मुनाफा और नौकरी में वेतन वृद्धि होने की अच्छी संभावना है। व्यापार में अच्छा मुनाफा मिलेगा
करें पूजा-पाठ और दान
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि ग्रहों के अशुभ असर से बचने के लिए हनुमानजी की पूजा करनी चाहिए। हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें। भगवान शिव और माता दुर्गा की आराधना करनी चाहिए। महामृत्युंजय मंत्र और दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए।
