21 जनवरी से नहरबंदी तय, हुसैनीवाला गेट अधूरे और बीकानेर कैनाल की सफाई नहीं; किसानों को सिंचाई पानी पर संकट
Sunday, Jan 18, 2026-03:15 PM (IST)
श्रीगंगानगर। फिरोजपुर फीडर की रिलाइनिंग के लिए 21 जनवरी से प्रस्तावित नहरबंदी से पहले गंगनहर क्षेत्र में सिंचाई संकट गहराता नजर आ रहा है। हुसैनीवाला हेड के गेटों की मरम्मत अब तक पूरी नहीं हो पाई है और पुरानी बीकानेर कैनाल की सफाई शुरू तक नहीं हुई है। ऐसे में नहरबंदी के दौरान बीकानेर कैनाल के माध्यम से खखां हेड पर 1500 क्यूसेक पानी पहुंचाने के प्रशासनिक दावों पर किसानों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इधर ग्रामीण किसान मजदूर समिति, अखिल भारतीय किसान सभा और टेल किसान समिति की संयुक्त बैठक गुरुद्वारा सिंह सभा में आयोजित की गई। बैठक में पूर्व मंत्री सुरेंद्रपाल सिंह टीटी और सिंचाई विभाग की ओर से पूरा पानी उपलब्ध करवाने का आश्वासन मिलने के बाद 19 जनवरी को प्रस्तावित जिला प्रशासन के घेराव को स्थगित कर दिया गया। किसान संगठनों ने निर्णय लिया कि 23 जनवरी को गुरुद्वारा सिंह सभा में दोबारा बैठक कर हालात की समीक्षा की जाएगी।
बैठक में गंगनहर प्रोजेक्ट चेयरमैन हरविंदर गिल, जीकेएस प्रदेशाध्यक्ष रणजीत सिंह राजू, प्रवक्ता गैलेक्सी बराड़, जीजी वितरण अध्यक्ष लाभ सिंह, गुरदीप सिंह गिल, रजिंद्रपाल बुर्जवाला, अखिल भारतीय किसान सभा के जिलाध्यक्ष कालू थोरी, टेल किसान समिति से अवतार सिंह, हैपी ढिल्लों, निशान सिंह मान सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
किसान संगठनों ने प्रशासन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि हुसैनीवाला हेड और बीकानेर कैनाल की स्थिति को लेकर न तो किसानों को बैठक में बुलाया गया और न ही स्थिति स्पष्ट की गई। एसडीएम नयन गौतम और सिंचाई विभाग के एसई धीरज चावला सहित अधिकारियों की समिति ने निरीक्षण तो किया, लेकिन 17 जनवरी को कलेक्टर द्वारा किसानों के साथ प्रस्तावित बैठक नहीं हुई।
किसानों ने बताया कि शुक्रवार शाम तक हुसैनीवाला दरिया के कुल गेटों में से केवल दो गेटों की मरम्मत ही पूरी हो सकी थी। वहीं जीरो से 45 आरडी तक पुरानी बीकानेर कैनाल की सफाई शुरू नहीं हुई थी और आरडी 45 पर बना चार फीट ऊंचा क्रस्ट भी नहीं हटाया गया। नहरबंदी शुरू होने में मात्र चार दिन शेष हैं, जबकि दरिया में पोंड बनाने में ही दो से तीन दिन लग सकते हैं।
किसान संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि 21 जनवरी से अगले 45 दिनों तक खखां हेड पर 1500 क्यूसेक पानी नहीं मिला, तो गंगनहर क्षेत्र की रबी फसलें बुरी तरह प्रभावित होंगी। अभी तक सरसों को केवल एक सिंचाई मिली है और गेहूं की फसल को एक भी पानी नहीं मिल पाया है। किसानों ने स्पष्ट किया कि वे रिलाइनिंग के विरोध में नहीं हैं, लेकिन इसके कारण सिंचाई संकट स्वीकार्य नहीं है।
