कुंभलगढ़ में होटल बिजली संकट से जूझ रहे, जनरेटर और डीज़ल पर खर्च बढ़ा
Wednesday, Jun 03, 2026-03:47 PM (IST)
कुंभलगढ़: विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कुंभलगढ़ के होटल उद्योग को वर्तमान समय में गंभीर बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र में बिजली की अनियमित आपूर्ति और भूराजनीतिक परिस्थितियों के कारण डीज़ल की कमी ने होटल संचालकों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। लगभग 100 होटल, रिसॉर्ट और होम-स्टे प्रभावित हैं। हालांकि पर्यटक इसे सीधे अनुभव नहीं कर रहे हैं, क्योंकि होटल संचालक भारी खर्च कर जनरेटरों के माध्यम से बिजली व्यवस्था बनाए रख रहे हैं।
होटल व्यवसायियों का कहना है कि एक होटल को प्रतिमाह औसतन 2 से 7 लाख रुपए तक जनरेटर और डीज़ल पर खर्च करना पड़ रहा है। बिजली अब सुविधा नहीं, बल्कि एक तरह का “सरप्राइज पैकेज” बन चुकी है। कभी कुछ घंटों के लिए आपूर्ति होती है, तो कभी लंबे समय तक बिजली नहीं रहती। लाइन फॉल्ट होने पर निगम से संपर्क करना भी चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि फोन कभी-कभी ही उपलब्ध होता है।
व्यवसायियों का तंज है कि पर्यटक कुंभलगढ़ की ऐतिहासिक विरासत देखने आते हैं, लेकिन उन्हें विरासत में मिल रहा है केवल जनरेटर का धुआं और डीज़ल का बढ़ता बिल। लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी बिजली व्यवस्था स्थिर नहीं हो रही। इस स्थिति में मुनाफा कमाना तो दूर, खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है।
होटल एसोसिएशन के अनुसार, बिजली संकट कई प्रशासनिक बैठकों, जनसुनवाई और सरकारी कार्यक्रमों में उठाया गया, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं निकला। यदि समस्या बनी रहती है, तो इसका असर होटल उद्योग के साथ-साथ स्थानीय व्यापार, रेस्तरां, दुकानदार, टैक्सी संचालक और अन्य पर्यटन आधारित व्यवसायों पर भी पड़ेगा। बढ़ती संचालन लागत और घटती आय से कर्मचारियों की संख्या घटाने या वेतन में कटौती जैसी परिस्थितियाँ भी उत्पन्न हो सकती हैं।
निगम अधिकारियों का कहना है कि आकस्मिक तकनीकी बाधाओं और प्राकृतिक आपदाओं को छोड़कर क्षेत्र में अब 70-80 प्रतिशत बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। लंबे समय में समाधान के लिए 132 केवी विद्युत लाइन और गवार जीएसएस परियोजना पर काम चल रहा है, जिसे वर्ष 2027 तक पूरा करने की संभावना है।
होटल व्यवसायियों का तंज है कि यदि यही हाल रहा तो भविष्य में कुंभलगढ़ के पर्यटन आकर्षणों में “24 घंटे चलने वाले जनरेटरों की गूंज” भी शामिल करना पड़ सकता है।
