“एक घंटी में उठे फोन”: वसुंधरा राजे का अल्टीमेटम, कार्यकर्ता के नाम सत्ता-सिस्टम को सीधा संदेश!

Sunday, Jan 04, 2026-04:15 PM (IST)

राजस्थान की राजनीति में आज शब्द सिर्फ भाषण नहीं रहे, बल्कि चेतावनी बनते दिखाई दिए, जब पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने संगठन, सत्ता और सिस्टम—तीनों को एक ही मंच से सीधा संदेश दे दिया। नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशनल क्लब में आयोजित भाजपा की प्रदेश संगठनात्मक कार्यशाला में राजे का भाषण महज़ कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक तंत्र के लिए एक स्पष्ट अल्टीमेटम बन गया।

राजे ने अपने संबोधन में कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं के बिना प्राणहीन है और संगठन को मजबूत करने के लिए सबसे पहले कार्यकर्ता को सशक्त करना जरूरी है। उन्होंने दो टूक शब्दों में अधिकारियों को चेताते हुए कहा कि पार्टी कार्यकर्ता की एक घंटी में फोन उठना चाहिए, अन्यथा परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें। यह बयान सीधे-सीधे उस ब्यूरोक्रेसी की कार्यशैली पर सवाल था, जो अक्सर जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं की आवाज को नजरअंदाज करती रही है।

उन्होंने संगठनात्मक ढांचे को रेखांकित करते हुए कहा कि गांव में बूथ अध्यक्ष, मंडल में मंडल अध्यक्ष और जिले में जिलाध्यक्ष—तीनों पार्टी के एंबेसेडर हैं। जनता के काम उनके हस्ताक्षर से होने चाहिए, क्योंकि कार्यकर्ता की आवाज ही प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की आवाज होती है। राजे ने साफ किया कि कार्यकर्ता की उपेक्षा किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अपने भाषण में वसुंधरा राजे ने भाजपा के संघर्षकाल को भी याद किया। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब देश की दसों दिशाओं में कांग्रेस का वर्चस्व था, लेकिन आज चारों ओर भाजपा दिखाई देती है। यह किसी सत्ता की कृपा नहीं, बल्कि उन कार्यकर्ताओं की तपस्या का परिणाम है, जिन्होंने भूख-प्यास की परवाह किए बिना केवल कमल खिलाने का काम किया।

भावनात्मक माहौल के बीच राजे ने शेर पढ़ते हुए कहा—
“किसी रोते हुए चेहरे से आँसू पूछ तो सही,
किसी बेसहारा की लाठी बन तो सही…
किसी के ज़ख्म पर मरहम लगा तो सही।”

यह पंक्तियां केवल कविता नहीं थीं, बल्कि कार्यकर्ता-केंद्रित राजनीति का स्पष्ट संदेश थीं। कुल मिलाकर वसुंधरा राजे का यह बयान न सिर्फ संगठन को जोश देने वाला है, बल्कि सत्ता और सिस्टम को यह याद दिलाने की कोशिश भी है कि राजनीति की असली ताकत फाइलों में नहीं, बल्कि उस कार्यकर्ता में है, जिसकी एक घंटी अब अनसुनी नहीं रहनी चाहिए।


Content Editor

Payal Choudhary

सबसे ज्यादा पढ़े गए

Related News