सीकर की अनोखी पहल! 3 रुपये की थैली प्लास्टिक को दे रही मात, महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर

Saturday, Apr 04, 2026-06:35 PM (IST)

सीकर: आज के समय में प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग हमारे पर्यावरण और सेहत पर बुरा असर डाल रहा है। यह प्लास्टिक लंबे समय तक नष्ट नहीं होता, जिससे इसकी समस्या और भी बढ़ती जा रही है। ऐसे में सीकर नगर परिषद ने एक अनोखी पहल शुरू की है, जो न केवल प्लास्टिक के उपयोग को कम करने में मदद कर रही है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर भी बना रही है।

 

इस पहल के तहत नगर परिषद टीम पुराने कपड़ों को इकट्ठा कर उनसे मजबूत और उपयोगी थैलियां तैयार कर रही है। इन थैलियों की कीमत भी बेहद कम रखी गई है, ताकि हर कोई इन्हें आसानी से खरीद सके। 3 किलो की थैली मात्र ₹3 और 5 किलो की थैली ₹5 में उपलब्ध है, जो सब्जी विक्रेताओं और आम लोगों द्वारा खूब पसंद की जा रही है।

 

इस पहल में 11 से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो स्वयं सहायता समूह से संबंधित हैं। ये महिलाएं अपने हुनर से अलग-अलग प्रकार के बैग तैयार कर रही हैं। यह पहल महिलाओं के लिए रोजगार का एक अच्छा अवसर साबित हो रही है। नगर परिषद की टीम का कहना है कि वे पुराने कपड़ों को इकट्ठा कर उन में से सही कपड़े जरूरतमंदों को देती हैं, जबकि बाकी बचे कपड़ों से उपयोगी वस्तुएं तैयार करती हैं।

 

जहां लोग पुराने कपड़ों को बेकार समझकर फेंक देते हैं, वहीं सीकर नगर परिषद की टीम उन्हीं कपड़ों से टिफिन बैग, क्लॉथ बैग, बैंगल्स बैग और फाइल बैग जैसे कई उत्पाद तैयार कर रही है। इस पहल से न केवल बेकार कपड़ों का पुन: उपयोग हो रहा है, बल्कि प्लास्टिक के उपयोग को भी कम किया जा रहा है।

 

नगर परिषद की महिला टीम घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रही है। उर्मिला सेन, जो इस पहल में सक्रिय रूप से शामिल हैं, बताती हैं कि वे लोगों को समझाती हैं कि पुराने कपड़ों को फेंकने के बजाय उन्हें नगर परिषद में जमा कराएं। इस पहल का असर अब दिखने लगा है, और लोग बढ़-चढ़कर इसमें भाग ले रहे हैं, जिससे पर्यावरण को बचाने में भी योगदान मिल रहा है।

 

इस पहल ने न केवल पर्यावरण को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही एक सामाजिक बदलाव की शुरुआत भी की है।


Content Editor

Anil Jangid

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