सिरोही की आदिवासी महिलाओं ने बनाया 800 किलो हर्बल गुलाल, प्राकृतिक रंगों की गुजरात तक डिमांड
Monday, Mar 02, 2026-07:30 PM (IST)
सिरोही: सिरोही जिले की आदिवासी महिलाओं ने होली के त्यौहार से पहले प्राकृतिक और सुरक्षित हर्बल गुलाल तैयार कर नया उदाहरण पेश किया है। जिले के आबूरोड और पिंडवाड़ा ब्लॉक की लगभग 175 महिलाएं जंगलों से पलाश (टेशू) के फूल इकट्ठा कर इसे गुलाल में बदल रही हैं। राजीविका स्वयं सहायता समूह के सहयोग से अब तक 800 किलो से अधिक हर्बल गुलाल तैयार किया जा चुका है। यह गुलाल पूरी तरह से प्राकृतिक है और त्वचा के लिए सुरक्षित माना जाता है।
हर्बल गुलाल बनाने की प्रक्रिया पारंपरिक और वैज्ञानिक तरीकों का मिश्रण है। महिलाएं पहाड़ी इलाकों से पलाश के फूल इकट्ठा करती हैं और बसंतगढ़ व निचलागढ़ वन धन विकास केंद्रों में उन्हें प्रोसेस किया जाता है। पलाश के फूलों के अलावा गुलाब, गेंदा, चुकंदर और अन्य प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग करके गुलाल को आकर्षक रंग और सुगंध दी जाती है। फूलों को सुखाकर पीसा जाता है और उसके बाद गुलाल तैयार किया जाता है।
इस पहल ने न केवल ग्रामीण महिलाओं को व्यस्त रखा है, बल्कि उन्हें आजीविका का सम्मानजनक अवसर भी प्रदान किया है। महिलाएं घर के कामकाज के साथ-साथ इस स्वरोजगार से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।
सिरोही में तैयार हर्बल गुलाल की मांग अब राजस्थान के बाहर भी बढ़ गई है। राजीविका की जिला परियोजना प्रबंधक अम्बिका राणावत के अनुसार यह प्राकृतिक गुलाल स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित होने के कारण लोगों की पहली पसंद बन गया है। पिंडवाड़ा के ब्लॉक परियोजना प्रबंधक मनोज मीणा ने बताया कि गुजरात और अन्य राज्यों से भी भारी मात्रा में ऑर्डर मिल रहे हैं।
इस पहल ने आदिवासी महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने में मदद की है। राजीविका समूह के माध्यम से महिलाएं अब सिर्फ श्रमिक नहीं, बल्कि उद्यमी के रूप में उभर रही हैं। स्थानीय प्रशासन और सरकार के सहयोग से शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट आने वाले समय में जिले के अन्य क्षेत्रों के लिए भी मिसाल बनेगा।
इस बार होली पर लोग सिरोही की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए प्राकृतिक गुलाल से खेलेंगे, जिससे उनकी त्वचा सुरक्षित रहेगी और 175 महिलाओं के घरों में खुशियों के रंग भरेंगे।
