राजस्थान में OBC आरक्षण की तस्वीर साफ, आयोग ने CM को सौंपी 900 पन्नों की रिपोर्ट

Thursday, Aug 06, 2026-01:36 PM (IST)

जयपुर। राजस्थान की सियासत में OBC आरक्षण को लेकर सबसे बड़े सवाल का जवाब अब सामने आ गया है। OBC आयोग ने सरकार के सामने करीब 900 पन्नों की रिपोर्ट सौंप कर स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में आरक्षण की तस्वीर लगभग साफ कर दी है। इसी रिपोर्ट के आधार पर अब आगामी चुनावों में OBC आरक्षण तय होगा।


करीब 900 पन्नों की इस रिपोर्ट के अनुसार, OBC की 10-11 जातियों में से हर एक जाती में एक हजार से ज़्यादा लोगों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिला है। सूत्रों के मुताबिक, OBC और MBC या अति पिछड़ा वर्ग को अलग आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्रदेश के 309 नगरीय निकायों में से 60 के अध्यक्ष पद OBC के लिए आरक्षित होंगे और लगभग इसी रेश्यो में पंचायती राज संस्थाओं में भी आरक्षण लागु होगा।


बतादे कि आयोग की यह रिपोर्ट अब कैबिनेट की बैठक में प्रस्तुत की जाएगी और इस बार आरक्षण के लिए लॉटरी पारम्परिक पर्ची के बजाय कम्प्यूटर के माध्यम से निकाली जाएगी। मुख्यमंत्री आवास पर आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व जिला न्यायाधीश मदन लाल भाटी ने सदस्य राजीव सक्सेना, मोहन मोरवाल, गोपाल कृष्ण और पवन मंडाविया के साथ मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा से मुलाकात कर रिपोर्ट सौंपी। इस अवसर पर मंत्री मदन दिलावर, झाबर सिंह खर्रा और जोगाराम पटेल भी वहां उपस्थित थे। अब राज्य सरकार आयोग की सिफारिशों का अध्ययन करेगी और आगे की कार्रवाई करेगी।

 

सर्वे और चुनावी डेटा पर आधारित रिपोर्ट 


आयोग की रिपोर्ट दो भागों में तैयार की गई है, जिसमे कुल 900 पन्नों है। पहले भाग में जनाधार, फील्ड सर्वे, पिछले दो पंचायत-निकाय चुनावों का डेटा, केंद्र एवं राज्य की OBC संबंधी योजनाएं तथा सर्वे से पता चली OBC की जातिवार राजनीतिक भागीदारी का विश्लेषण किया गया है। 


रिपोर्ट तैयार करने के लिए कुल 74.85 लाख परिवारों का सर्वे किया गया, जिसमें  उनसे 19 प्रश्न पूछे गए। इन सवालों में परिवार के किसी सदस्य को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलने से जुड़े सवाल भी शामिल थे। इस सर्वे से पता चला कि प्रदेश में जाट जाति की सबसे ज्यादा आबादी है और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में भी यह जाती सबसे आगे रहा।


रिपोर्ट के दूसरे भाग में पंचायतों और नगर निकायों के वार्ड और पदवार OBC प्रतिनिधित्व का प्रस्ताव दिया गया है। आंकड़ों के अनुसार पिछले दो चुनावों में आरक्षण के माध्यम से OBC को करीब 10 से 14 प्रतिशत पदों पर प्रतिनिधित्व मिला। हालांकि सामान्य श्रेणी की सीटों पर जीत के कारण पंचायतों में उनका प्रतिनिधित्व 46 प्रतिशत और निकायों में 38 प्रतिशत तक पहुंच गया।

 

आरक्षण कानून में बदलाव की नहीं दी सलाह 


बताया जा रहा है कि OBC आयोग ने अपनी रिपोर्ट में आरक्षण से जुड़े मौजूदा कानूनों में किसी प्रकार के संशोधन की सिफारिश नहीं की है। आरक्षण की अंतिम तस्वीर कंप्यूटराइज्ड लॉटरी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

 

रिपोर्ट से जुड़े अन्य तथ्य 

 

आयोग ने मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट गोल्डन कवर में लपेटकर सौंपी, और आयोग के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को तिरंगे संगो का गुलदस्ता भी भेंट किया।

रिपोर्ट के अनुसार, सलूम्बर, बांसवाड़ा और डूंगरपुर में ट्राइबल की 100 फीसदी सीटें आरक्षित रहेगी।

 

स्थानीय चुनावों पर मुख्यमंत्री का बयान


मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार स्थानीय चुनाव समय पर कराने के अपने वादे को पूरा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि 'वन स्टेट-वन इलेक्शन' व्यवस्था से विकास और जनकल्याण के कार्यों को निरंतर गति मिलेगी, साथ ही समय, धन और संसाधनों की भी बचत होगी।

 

कुल मिलाकर, OBC आयोग की रिपोर्ट के बाद अब स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में आरक्षण की तस्वीर लगभग साफ हो गई है। अब सबकी नजर राज्य सरकार और कैबिनेट के फैसले पर है, क्योंकि इसी रिपोर्ट के आधार पर राजस्थान के निकाय और पंचायत चुनावों में OBC आरक्षण की अंतिम तस्वीर तय होगी। आपको क्या लगता है कि आयोग की इस रिपोर्ट से स्थानीय निकाय चुनावों में सभी OBC वर्गों को संतुलित और न्यायसंगत राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल पाएगा?


Content Editor

Anil Jangid

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