प्रतापगढ़ से बांसवाड़ा तक महावीर जयंती की धूम, शहरों में भव्य शोभायात्राएं निकलीं
Monday, Mar 30, 2026-05:15 PM (IST)
प्रतापगढ़: राजस्थान में भगवान महावीर स्वामी के 2625वें जन्म कल्याणक महोत्सव के मौके पर प्रतापगढ़ से लेकर बांसवाड़ा और डूंगरपुर तक भव्य और भक्तिमय आयोजन किए गए। जैन समाज ने ‘अहिंसा परमो धर्म’ और ‘जियो और जीने दो’ के संदेश को आमजन तक पहुंचाया।
धर्मनगरी प्रतापगढ़ में महोत्सव की शुरुआत सेवा कार्य से हुई। जूना मंदिर हॉल में रक्तदान शिविर आयोजित किया गया, जिसमें युवाओं और महिलाओं की भागीदारी रही और कुल 101 यूनिट रक्तदान किया गया। सुबह 5 बजे प्रभात फेरी और 9 बजे भव्य शोभायात्रा निकाली गई। महोत्सव का मुख्य आकर्षण रात्रि 8 बजे तालाब पर आयोजित लेजर शो रहा, जिसमें भगवान महावीर के जीवन प्रसंगों को आधुनिक तकनीक से दर्शाया गया।
डूंगरपुर के भीलूड़ा/सागवाड़ा में भगवान महावीर की प्रतिमा को रजत रथ में विराजमान कर नगर भ्रमण कराया गया। पारंपरिक गरबा और लोक नृत्यों ने शोभायात्रा की भव्यता बढ़ाई।
बांसवाड़ा शहर में दिगंबर और श्वेतांबर समाज ने एकजुट होकर शहर के प्रमुख मार्गों से 10 से अधिक आकर्षक झांकियों के साथ शोभायात्रा निकाली। आचार्य श्री प्रन्न सागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित किया।
राजगढ़ (अलवर) में दिगंबर जैन समाज ने बैंड-बाजों के साथ प्रभात फेरी निकाली। अनाज मंडी और गोल सर्किल होते हुए यात्रा नसिया जी मंदिर पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने "जियो और जीने दो" के नारों के साथ उत्सव का आनंद लिया।
अजमेर और धौलपुर में भी भव्य शोभायात्राएं निकाली गईं। धौलपुर में जैन समाज ने शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए 10 सुसज्जित झांकियों के साथ रथ यात्रा का आयोजन किया। भगवान महावीर स्वामी की स्वर्णमयी प्रतिमा सभी झांकियों और रथों का आकर्षण केंद्र रही।
जयपुर में सुबह की प्रभात फेरियों से लेकर महाआरती तक शहर भगवान महावीर के जयकारों से गूंजता रहा। पहली बार 24 तीर्थंकरों के 24 स्वर्णिम आभा से सजे रथों की श्रृंखला में भगवान महावीर की स्वर्ण जड़ित प्रतिमा वाला रथ अंतिम आकर्षण रहा।
इस महोत्सव ने न केवल जैन धर्म के सिद्धांतों और अहिंसा के संदेश को व्यापक रूप से फैलाया, बल्कि राजस्थान के लोगों को भक्ति, अनुशासन और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण भी दिखाया।
