करौली में फैल रहा विलायती बबूल: जहरीले कांटे इंसान और पशु के लिए जानलेवा, बर्बाद हो रही जमीनें
Wednesday, Apr 15, 2026-06:20 PM (IST)
करौली: राजस्थान के करौली जिले में तेजी से फैल रहे विलायती बबूल ने अब गंभीर खतरे का रूप ले लिया है। इस कांटेदार पौधे की जहरीली शाखाएं इंसान और पशुओं के लिए जानलेवा साबित हो रही हैं, और साथ ही यह पर्यावरण पर भी गहरा असर डाल रही हैं। यह पौधा मिट्टी की गुणवत्ता को बिगाड़ने और भूजल स्तर को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ जैव विविधता को भी प्रभावित कर रहा है, जिससे अन्य पौधों का उगना मुश्किल हो रहा है।
विलायती बबूल, जिसे Acacia mearnsii के नाम से जाना जाता है, मूल रूप से ऑस्ट्रेलिया का पौधा है, लेकिन 19वीं शताब्दी में अंग्रेजों द्वारा इसे भारत लाया गया था। इसका उद्देश्य रेगिस्तान में मिट्टी के कटाव को रोकना था, लेकिन अब यह पौधा नियंत्रण से बाहर हो गया है और मरुस्थलीय इलाकों में बड़ी समस्या बन चुका है। करौली जिले के बंजर और खाली पड़े भूखंडों में इस पौधे ने अपना कब्जा जमा लिया है।
यह पौधा देखने में सामान्य और हरा-भरा लगता है, लेकिन इसके कांटे बहुत खतरनाक होते हैं। यदि यह कांटा किसी इंसान या पशु को चुभ जाए तो गंभीर घाव हो सकते हैं, और कई बार यह घाव इतना गहरा हो जाता है कि जान का खतरा भी उत्पन्न हो सकता है। वन्यजीवों के लिए यह पौधा और भी खतरनाक साबित हो रहा है। जब कोई जानवर इस कांटे से घायल होता है, तो घाव धीरे-धीरे बढ़ता जाता है, जिससे वह चलने में असमर्थ हो जाता है और शिकारी जानवरों का शिकार बन सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पौधा न केवल जीव-जंतुओं के लिए, बल्कि जमीन के लिए भी अत्यंत हानिकारक है। यह भूजल स्तर को गिराता है और मिट्टी की गुणवत्ता को बिगाड़ता है, जिससे आसपास के क्षेत्र में अन्य पौधे उगने में सक्षम नहीं होते। इसके फैलने से जैव विविधता भी प्रभावित हो रही है।
इसके फैलाव को नियंत्रित करने के लिए विशेषज्ञों का सुझाव है कि सबसे पहले इसकी शाखाओं को काटकर अलग किया जाए ताकि बीज बनने की प्रक्रिया रुक सके। फिर जड़ समेत इसे उखाड़ने से इस पौधे के फैलाव को रोका जा सकता है। जब शाखाएं हटाई जाती हैं, तो जमीन पर धूप पहुंचने लगती है, जिससे अन्य पौधों को उगने का अवसर मिलता है।
