करौली में ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का विरोध, किसान बोले- उपजाऊ जमीन नहीं देंगे
Wednesday, Jun 03, 2026-03:07 PM (IST)
करौली: प्रस्तावित ब्यावर-भरतपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे को लेकर करौली जिले में किसानों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। परियोजना के रूट में आने वाले गांवों के किसान कहते हैं कि यदि एक्सप्रेस-वे वर्तमान प्रस्तावित मार्ग पर बनाया गया, तो हजारों बीघा उपजाऊ कृषि भूमि प्रभावित होगी और कई किसान अपनी आजीविका के मुख्य साधन से वंचित हो जाएंगे। इस आशंका के चलते किसानों ने आंदोलन की राह अपनाई है और सरकार से परियोजना को निरस्त करने की मांग की है।
किसानों का कहना है कि यह केवल भूमि अधिग्रहण का मुद्दा नहीं है। प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे जमीन से लगभग 15 फीट ऊंचाई पर बनाया जाएगा। इससे खेतों तक पहुँचने वाले पारंपरिक रास्ते बंद हो जाएंगे और किसानों को अपने खेतों तक पहुँचने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा। किसान नेता अजीत डागुर ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
शेरपुर, हाडोली, रारा, शाहपुर, करसोली, चिनायटा, खेड़ी हैवत, सोमली, जटवाड़ा और भुकरावली सहित कई गांवों में लगातार बैठकें आयोजित की जा रही हैं। किसानों ने सुझाव दिया है कि नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के बजाय भरतपुर-हिंडौन-करौली-सवाई माधोपुर स्टेट मेगा हाईवे का फोरलेन विस्तार किया जाए। इससे विकास कार्य भी हो सकेगा और किसानों की जमीन भी सुरक्षित रहेगी।
किसानों ने राज्य अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास आयोग के अध्यक्ष राजेन्द्र नायक को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांग मुख्यमंत्री तक पहुँचाने का प्रयास किया। उनका कहना है कि विकास के नाम पर उपजाऊ जमीन छीनना उचित नहीं है और सरकार को ग्रामीण जीवन और कृषि व्यवस्था पर पड़ने वाले व्यापक प्रभावों को ध्यान में रखना चाहिए।
इस विरोध प्रदर्शन ने यह स्पष्ट किया है कि स्थानीय किसानों और ग्रामीण समुदाय के सहयोग के बिना बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का काम नहीं चल सकता। किसान अपनी जमीन और आजीविका की रक्षा के लिए पूरी तरह संगठित हैं और अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
