विकसित भारत 2047 के लिए रिसोर्स चैंपियंन के रूप में हिंदुस्तान जिंक की महत्वपूर्ण भूमिका
Thursday, Aug 13, 2026-08:05 PM (IST)
भारत जब आजादी के 100 वर्ष पूरे करने की ओर बढ़ रहा है, तब आर्थिक और तकनीकी आत्मनिर्भरता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो जाती है जितनी राजनीतिक स्वतंत्रता। विकसित भारत 2047 का सपना तभी साकार होगा, जब देश के पास ऐसे मजबूत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी संसाधन एवं धातु क्षेत्र के उद्योग हों, जो भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हों।
नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा निर्माण, डिजिटल नेटवर्क और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों की नींव जिंक, कॉपर, सिल्वर, एल्यूमीनियम तथा अन्य महत्वपूर्ण खनिजों पर टिकी है। ऐसे में भारत को केवल खनिज संसाधनों का स्वामित्व ही नहीं, बल्कि उनकी खोज, खनन, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धित उत्पाद निर्माण की संपूर्ण क्षमता विकसित करनी होगी।
भारत के रिसोर्स चैंपियन के रूप में उभरता हिंदुस्तान जिंक
हिंदुस्तान जिंक इस परिवर्तन का एक मजबूत उदाहरण है। लगभग छह दशक पहले स्थापित कंपनी ने विनिवेश के बाद उल्लेखनीय प्रगति की है और आज यह विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक कंपनियों तथा देश की सबसे बड़ी सिल्वर उत्पादक कंपनी बन चुकी है।
कंपनी ने अपनी भविष्य की विकास रणनीति ‘ हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड 2.0’ के तहत अगले पांच वर्षों में 40 हजार से 50 हजार करोड़ रुपये निवेश की योजना बनाई है। इस रणनीति का लक्ष्य वर्ष 2030 तक परिष्कृत धातु उत्पादन क्षमता को 11 लाख टन से बढ़ाकर 20 लाख टन करना, सिल्वर उत्पादन में वृद्धि करना तथा एक विविध और तकनीक-आधारित मल्टी-मेटल पोर्टफोलियो विकसित करना है।
जिंक से आगे बढ़कर मल्टी-मेटल भविष्य की ओर
हिंदुस्तान जिंक की रणनीति केवल अधिक जिंक और सिल्वर उत्पादन तक सीमित नहीं है। कंपनी ने हाल के वर्षों में टंगस्टन, पोटाश और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों का अधिग्रहण किया है। इसके साथ ही कंपनी राजस्थान में प्रतिवर्ष 1 करोड़ टन क्षमता वाले टेलिंग्स री-प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, जिससे पहले अनुपयोगी माने जाने वाले संसाधनों से भी मूल्यवान खनिजों की पुनर्प्राप्ति संभव होगी। यह पहल भारत की ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ और संसाधन दक्षता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राजस्थान में विकसित होगा धातु आधारित औद्योगिक इकोसिस्टम
हिंदुस्तान जिंक राजस्थान में जिंक आधारित औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है। इससे एलॉय, वायर, इंजीनियरिंग कंपोनेंट्स और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। इससे न केवल घरेलू विनिर्माण को मजबूती मिलेगी, बल्कि रोजगार सृजन और क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी। यह मॉडल दर्शाता है कि भविष्य में सफलता केवल खनिज उत्पादन बढ़ाने से नहीं, बल्कि खनन से लेकर उन्नत उत्पाद निर्माण तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने से मिलेगी।
भारत सरकार की राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन जैसी पहलें देश को संसाधन सुरक्षा की दिशा में आगे बढ़ा रही हैं। ऐसे समय में हिंदुस्तान जिंक जैसी कंपनियां सरकार के विजन को जमीनी स्तर पर साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कंपनी आधुनिक तकनीक, सतत खनन, जल संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण, कार्बन उत्सर्जन में कमी और सामुदायिक विकास जैसे क्षेत्रों में लगातार निवेश कर रही है। इससे यह साबित होता है कि जिम्मेदार खनन और औद्योगिक विकास साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।
वर्ष 2047 तक भारत को ऐसे उद्योगों की आवश्यकता होगी जो खनिजों की खोज करें, उनका प्रसंस्करण करें, उनसे उन्नत सामग्री तैयार करें और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करें। हिंदुस्तान जिंक इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाते हुए भारत को केवल संसाधन संपन्न राष्ट्र नहीं, बल्कि संसाधन आधारित मैन्यूफेक्चरिंग शक्ति बनाने की दिशा में काम कर रही है।
