नागौर जिले में निजी वाहनों का सैलाब, ट्रैफिक और प्रदूषण बना बड़ा संकट
Thursday, Apr 30, 2026-06:41 PM (IST)
नागौर | नागौर जिले में निजी वाहनों की संख्या में लगातार तेज़ी से वृद्धि हो रही है, और अब यह स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कुल पंजीकृत वाहनों में 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा केवल प्राइवेट गाड़ियों का हो गया है। जिला सड़क सुरक्षा समिति द्वारा तैयार किए गए रोड सेफ्टी एक्शन प्लान के आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ है कि जिले में हर साल करीब 25 प्रतिशत की दर से वाहनों की संख्या बढ़ रही है, और इसमें सबसे ज्यादा बढ़ोतरी मोटरसाइकिलों और कारों में हो रही है।
जिले में कुल 5.71 लाख वाहन पंजीकृत हैं, जिनमें 3.70 लाख मोटरसाइकिलें, करीब 58 हजार कारें और जीपें, लगभग 2,000 ऑटो रिक्शा और टैक्सी, 1,564 सरकारी और निजी बसें, 26,497 हल्के माल वाहक वाहन, और 93,000 ट्रैक्टर एवं कृषि वाहन शामिल हैं। इसके बावजूद, व्यावसायिक वाहनों का हिस्सा महज 8.32 प्रतिशत से 10 प्रतिशत के बीच ही सिमटा हुआ है।
पार्किंग और प्रदूषण की समस्या:
निजी वाहनों की बढ़ती संख्या से सबसे बड़ी समस्याएं ट्रैफिक जाम, पार्किंग की कमी और बढ़ते प्रदूषण के रूप में उभर रही हैं। मुख्य बाजारों और चौराहों पर वाहनों के बेतरतीब खड़े होने से जाम की स्थिति आम हो गई है। पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण वाहन सड़कों पर खड़े किए जा रहे हैं, जिससे पैदल चलने वालों और आपातकालीन सेवाओं को भारी परेशानियां हो रही हैं। साथ ही, प्रदूषण के स्तर में भी खतरनाक वृद्धि हो रही है, जिससे सांस की बीमारियां और हृदय रोग जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
निजी वाहनों के बढ़ने के कारण:
निजी वाहनों के बढ़ने के कई कारण हैं, जिनमें आसान बैंक लोन, बढ़ता मध्यम वर्ग, और सार्वजनिक परिवहन की कमी प्रमुख हैं। जिले में सार्वजनिक बसों और अन्य परिवहन साधनों की कमी और उनकी अनियमितता के कारण लोग निजी वाहन खरीदने को मजबूर हैं।
समाधान की दिशा:
इस संकट का समाधान सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने, कार पूलिंग और साझा परिवहन को बढ़ावा देने, साइकिल ट्रैक और पैदल मार्ग विकसित करने, और पार्किंग की व्यवस्थित योजना तैयार करने में निहित है। साथ ही, ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन भी आवश्यक है।
एक्सपर्ट व्यू:
नागौर के जिला परिवहन अधिकारी अवधेश चौधरी ने कहा कि वाहनों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर पार्किंग व्यवस्था और सार्वजनिक परिवहन की सुविधा को बेहतर किया जाना चाहिए। टिकाऊ परिवहन विकल्पों को अपनाकर ही इस बढ़ते वाहन दबाव से राहत मिल सकती है।
